July 26, 2021

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पालनकर्ता होने का ईगो त्यागें पुरुष, बच्चे की परवरिश मां के हाथों ही सुनिश्चित- हाई कोर्ट


प्रयागराज: बच्चे की कस्टडी के लिए हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि बच्चे का भविष्य मां के हाथ में ही सुरक्षित रह सकता है. पिता और अभिभावक उसका ख्याल रख सकते हैं, लेकिन मां के साथ रहकर ही बच्चा सुरक्षित होता है. कोर्ट ने कहा है कि हमेशा से यही माना जाता है, जो सच भी है. इसको ध्यान में रखते हुए हिंदू अल्पसंख्यक एवं अभिभावक अधिनियम की 6(ए) में 5 साल तक के मासूम की अभिरक्षा का अधिकार मां के पास ही होना चाहिए. जस्टिस जेजे मुनीर ने यह आदेश गाजियाबाद की प्रीति राय की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas corpus) को स्वीकार करते हुए दिया है.  

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एडवोकेट विभू राय और अनुभव गौड़ समेत विपक्षी वकीलों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने यह निर्णय लिया है. जानकारी के मुताबिक याची प्रीति राय एक आईटी इंजीनियर (IT Engineer) हैं. उन्होंने याचिका दायर कर अपने 3 साल के बेटे अद्वैत की कस्टडी दिलाए जाने की मांग की थी. 

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प्रीति की याचिका का ऐसे किया विरोध
जानकारी के मुताबिक बेटा अद्वैत अपने पिता प्रशांत शर्मा और दादा-दादी के साथ उनके घर में रहता है. पिता प्रशांत के वकीलों ने प्रीति द्वारा दायर की गई याचिका के विरोध में कहा है कि बच्चे की कस्टडी के विवाद में प्रीति की याचिका मान्य नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यहां दोनों पेरेंट्स में से किसी की भी कस्टडी को अवैध करार नहीं दिया जा सकता. हालांकि कोर्ट ने अपना फैसला कायम रखते हुए कहा कि कुछ केस को छोड़कर 5 साल से कम उम्र वाले बच्चे मां के हाथ में ही सुरक्षित रह सकते हैं. 

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पालनकर्ता होने का घमंड पुरुषों को त्यागना चाहिए
फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जमाना अब बदल गया है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुरुष ही परिवार का कमाने वाला सदस्य होता है और महिला गृहिणी बनकर घर के काम करती है. आज दोनों कमा रहे हैं और परिवार का खर्च साथ मिलकर उठा सकते हैं. जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने पिता प्रशांत की उस दलील को भी अस्वीकर कर दिया, जहां उन्होंने कहा था कि प्रीति बतौर मां लापरवाह है. कोर्ट ने इस बात पर कहा कि प्रीति कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करती है, जहां काम की जरूरतें और काम करने के तौर-तरीके थोड़े अलग होते हैं. यह स्त्री और पुरुष दोनों पर लागू होता है. इससे प्रीति के मां होने के गुण को नहीं आंका जा सकता.

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सीजेएम को दिए ये आदेश
कोर्ट ने प्रशांत शर्मा को आदेश दिया है कि बच्चे की कस्टडी प्रीति को सौंपी जाए. साथ ही गाजियाबाद सीजेएम को अपनी उपस्थिति में आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए हैं. 

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