PM नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए Bangladesh तैयार, विदेश मंत्री Momen ने कहा, ‘यह हमारे लिए गर्व की बात’


ढाका: बांग्लादेश (Bangladesh) के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन (AK Abdul Momen) ने इस बात पर खुशी जताई है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत (India) के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) बांग्लादेश के 50वें स्वतंत्रता वर्षगांठ समारोह में भाग लेने आ रहे हैं. हमारे डिप्लोमैटिक कॉरेसपोंडेंट सिद्धांत सिब्बल से विशेष बातचीत में मोमन ने कहा कि भारत के साथ हमारा रिश्ता बेहद मजबूत है. उन्होंने कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) उपलब्ध कराने के लिए भी भारत की सराहना की. मोमन ने कहा कि भारत ने अपना वादा निभाया है और मुश्किल वक्त में बांग्लादेश की मदद की है. 

सवाल: इस यात्रा का मुख्य फोकस क्या है?
 

जवाब: यात्रा का मुख्य फोकस बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान की 100वीं वर्षगांठ है. हम बेहद खुश हैं कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री हमारे इन दो महान आयोजनों में शामिल हो रहे हैं. यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने बंगबंधु का सम्मान किया है. बांग्लादेश और भारत के रिश्ते काफी मधुर रहे हैं, दोनों देशों ने मिलकर काम किया है. विशेष रूप से कई भारतीय सैनिकों ने हमारी स्वतंत्रता के लिए खून बहाया है. इसलिए हमारी जीत, भारत की जीत भी है. इसके अलावा, इस वर्ष 2021 में, बांग्लादेश ने एलडीसी देश से ग्रेजुएट होने की सभी श्रेणियों को पूरा कर किया है. यह भारत के साथ राजनयिक संबंधों का 50वां वर्ष, हम एक साथ कई आयोजनों में शामिल हो रहे हैं.

सवाल: आप इस रिश्ते को किस तरह रेखांकित करते हैं?
 

जवाब: भारत के साथ हमारे संबंध ठोस रहे हैं. आजादी की लड़ाई के दौरान, बांग्लादेश और भारत दोनों ने मिलकर काम किया. अब फिर से, पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कूटनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. दुनिया के सभी पड़ोसी देशों में तनाव और समस्या होती हैं, लेकिन भारत के साथ हमारे रिश्ते बिल्कुल जुदा हैं. भारत के साथ हमारी 4000 किलोमीटर की सीमा है, भारत एक बड़ा देश है और मधुर संबंधों के कारण हमने अपनी अधिकांश समस्याओं मिल-बैठकर सुलझा लिया है. हमने पानी के बंटवारे, सीमा संबंधी विवाद सहित सभी बड़े मुद्दों को बातचीत से सुलझाया है, जो दोनों देशों की एक-दूसरे के प्रति समझ को दर्शाता है. हम भारत से यह कहना चाहते हैं कि बांग्लादेश जैसे दोस्त के होते हुए उसे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है. उसकी पूर्वी सीमा पूरी तरह सुरक्षित है. हम मानते हैं, हमारी प्रधानमंत्री मानती हैं कि कनेक्टिविटी ही उत्पादकता है और यही हमारे राष्ट्र पिता का दृष्टिकोण है. हम शांति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं और भारत हमारे साथ है. दोनों देश लगातार संबंधों को मजबूत बना रहे हैं.

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सवाल: पीएम नरेंद्र मोदी अपनी यात्रा के दौरान ओरकांडी भी जाएंगे, आप इसे कैसे देखते हैं?
 

जवाब: यह पीएम मोदी की उदारता को दर्शाता है कि वह न केवल राजधानी का दौरा कर रहे हैं, बल्कि बांग्लादेश के राष्ट्रपति की तुंगिपारा स्थित समाधि पर भी जाएंगे. इसके अलावा, वह सतखिरा और ओरकांडी का भी रुख करेंगे. मुझे लगता है कि यह कुछ नया है. कोरोना काल के बाद भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली विदेश यात्रा है, और इससे पता चलता है कि वह बांग्लादेश के प्रति प्यार और सम्मान की भावना रखते हैं.

सवाल: क्या कनेक्टिविटी पर कोई बात होगी, क्या कोई घोषणा हुई है? 
 

जवाब: हम नादिया से मुजीब नगर की ओर जाने वाली स्वाधीनता सड़क को खोलेंगे. यह एक ऐतिहासिक इवेंट है. 1971 में, 17 अप्रैल को कलकत्ता से 17 वाहन हमारे सभी नेताओं और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को लेकर मुजीबनगर आए थे. निर्वासन सरकार की स्थापना मुजीबनगर में की गई थी और यह सड़क मुजीब नगर की ओर जाती है. इसलिए यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक इवेंट है. हमारे बीच हल्दीबाड़ी से चिल्हाटी तक रेलवे ट्रैक है, जो काफी पहले से कार्गों के लिए खुला है और यात्रियों के लिए भी खोला जाएगा. कनेक्टिविटी सिर्फ रेल, सड़क, वायुमार्ग, जलमार्ग की ही नहीं है. बिजली सहित अन्य क्षेत्रों में भी हमारी कनेक्टिविटी मजबूत हुई है. हमें अब और आगे बढ़ने की जरूरत है. मैं सिलहट से हूं, जहां हजरत शाह जलाल की मजार है. मजार में खाना पकाने के लिए बड़े-बड़े बर्तन हैं, जिन्हें देखकर मैं अपनी मां से पूछा करता था कि इतने बड़े बर्तन कहां से आए. उन्होंने बताया था कि ये बर्तन दिल्ली से आए हैं. शुरुआत में दोनों देशों के बीच आवागमन जलमार्ग से ही होता था. मेरे दादी, दादा जब कलकत्ता आते-जाते, तो जलमार्ग ही इस्तेमाल करते. उस समय न कोई रेल थी और न कोई फ्लाइट. भारत में कई नदियां हैं, और मुझे लगता है कि आवागमन के सभी मार्गों को अब खोला जाना चाहिए. इससे परिवहन लागत भी कम होगी, हमारे लोगों के लिए घूमना आसान हो जाएगा और हम नदियों के प्राकृतिक नियम का पालन करेंगे. भारत से कुल 54 नदियां आती हैं, जिनमें से हम तीस्ता सहित केवल 6 पर काम कर रहे हैं. हमारी प्रधानमंत्री के पास एक विजन है, पूरे क्षेत्र का विकास करना है. यह एक साथ साझेदारी और सहयोग से किया जा सकता है. हमें इस बात की खुशी है कि पीएम मोदी हमारे दोस्त हैं, जो हमारी प्रधानमंत्री के साथ मिलकर विकास के मिशन पर काम कर रहे हैं.  

सवाल: आप भारत के वैक्सीन अभियान को कैसे देखते हैं?
 

जवाब: किसी को भी कोरोना महामारी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. कोरोना की शुरुआत में विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि बांग्लादेश में 5-10 मिलियन मौतें होंगी. क्योंकि यह भीड़भाड़, अत्यधिक घनी आबादी वाला देश है. लेकिन हमारी प्रधानमंत्री के प्रयासों की बदौलत हमने कोरोना से जंग में काफी अच्छा प्रदर्शन किया. बांग्लादेश ने तुरंत कदम उठाए. जब हमें पता चला कि वैक्सीन तैयार हो रही है, तो बांग्लादेश वैक्सीन निर्माण अभियान में शामिल हो गया. हमने इसके लिए यूरोपीय संघ को भुगतान किया और एक शर्त रखी कि बिना किसी भेदभाव के टीका सबको दिया जाएगा. फिर जब हमें पता चला कि भारत में भी वैक्सीन बन रही है, तो हमने तुरंत उससे संपर्क किया. भारत के प्रधानमंत्री ने हमें भरोसा दिलाया कि वैक्सीन उपलब्ध होते ही बांग्लादेश को भी मुहैया कराई जाएगी. पहले हमने 30 मिलियन वैक्सीन खरीदी और फिर भारत ने 2 मिलियन खुराक उपहार स्वरूप दीं. इसके लिए पीएम मोदी की जितनी तारीफ की जाए कम है. हमने कुछ कठिनाइयों के बावजूद भारत से अच्छे संबंध विकसित किए हैं.



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