Tata-Mistry विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मिस्त्री नहीं बन सकेंगे दोबारा चेयरमैन, टाटा ग्रुप के शेयर दौड़े


नई दिल्ली: Tata-Mistry Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने Tata Group की कंपनी Tata Sons और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के साइरस मिस्त्री के मामले पर आज फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने साइरस मिस्त्री को कंपनी का दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने का NCLAT का फैसला पलट दिया. सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम ने कहा कि साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाना सही है.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दौड़े Tata Group के शेयर 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले बाद टाटा ग्रुप के शेयरों Tata Steel Bsl, Indian Hotels, Tata Motors, Tata Power, Titan Company, Tata Coffee, Tata Investment Corporation, Tata Chemicals और Tata Communications
में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. ग्रुप कंपनियों के शेयरों में 5 परसेंट से ज्यादा का उछाल देखा गया. TCS का शेयर 1 परसेंट से ज्यादा चढ़ गया, जबकि टाटा मोटर्स में 5 परसेंट के करीब तेजी देखने को मिली. टाटा केमिकल्स में 3 परसेंट की तेजी रही और टाटा स्टील करीब 6 परसेंट उछल गया.  

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

सुप्रीम कोर्ट के फैसला टाटा ग्रुप के पक्ष में गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शेयर से जुड़े मामले को टाटा और मिस्त्री दोनों ग्रुप मिलकर सुलझाएं. टाटा संस और साइरस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने NCLAT के फैसले के खिलाफ याचिका दी थी. नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्राइब्यूनल ने 17 दिसंबर 2019 को यह फैसला सुनाया था कि टाटा संस के चेयरमैन पद पर मिस्त्री की दोबारा बहाली होगी. मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले साल 17 दिसंबर को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था. 
सुप्रीम कोर्ट ने आज यह फैसला पलट दिया. हालांकि NCLAT ने 10 जनवरी 2020 को जो फैसला लिया था सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरकरार रखा है. 

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क्या था Tata-Mistry विवाद 

आपको बता दें कि पालोनजी मिस्त्री के बेटे साइरस मिस्त्री को 2012 में रतन टाटा की जगह टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन महज 4 साल बाद 2016 में उन्हें अचानक पद से हटा दिया गया, इसके बाद जो विवादों का सिलसिला शुरू हुआ तो अबतक नहीं थमा. मिस्त्री परिवार की टाटा संस में 18.4% की हिस्सेदारी है. वो टाटा ट्रस्ट के बाद टाटा सन्स में दूसरे बड़े शेयर होल्डर्स हैं. 

शापूरजी पालोनजी समूह ने 17 दिसंबर 2020 को न्यायालय से कहा था कि अक्टूबर, 2016 को हुई बोर्ड की बैठक में मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाना ‘खूनी खेल’ और ‘घात’ लगाकर किया गया हमला था. यह कंपनी चलाने के सिद्धातों के खिलाफ था. टाटा समूह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि बोर्ड ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मिस्त्री को पद से हटाया था, इसमें कुछ गलत नहीं किया गया. 

टाटा समूह ने शापूरजी पालोनजी समूह की हिस्सेदारी खुद खरीदने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन इस प्रस्ताव को मिस्त्री परिवार ने ठुकरा दिया. टाटा समूह ने 5 सितंबर को शापूरजी पालोनजी समूह को अपने हिस्से के शेयर बेचने या गिरवी रखने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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