August 2, 2021

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जिस मशीन से हटाई जा रही स्वेज नहर में फंसी जहाज, उसे JCB नहीं कहते; जानिए असली नाम


नई दिल्ली:  स्वेज नहर में एक जहाज फंस गया है. आपने सोशल मीडिया पर उससे जुड़ी कई तस्वीरें भी देखी होगी. उनमें से एक तस्वीर सबसे ज्यादा वायरल हो रही है, जिसमें एक JCB मशीन उस जहाज को हटाने की कोशिश कर रही है. लोग इस तस्वीर को लेकर कई मजेदार मीम्स शेयर कर रहे हैं. मीम्स से इतर इस फोटो की एक खास बात है कि जो मशीन जहाज को हटा रही है, उसे ही JCB नहीं कहते हैं. दरअसल, जेसीबी मशीन का असली नाम अलग है. आइए जानते हैं…

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जहाज को हटा रही मशीन को क्या कहते हैं?
हम अक्सर खुदाई और कंस्ट्रक्शन  के काम में इस्तेमाल होने वाली मशीन देखते हैं. पीले रंग की इस मशीन पर काले अक्षरों में बड़ा-बड़ा जेसीबी लिखा होता है. दरअसल, JCB इस मशीन को बनाने वाली कंपनी का नाम है. जैसे पहले लोग कार को मारुति कहते थे. आज भी गांवों में बाइक को  हीरोहोंडा कहा जाता है. हालांकि, मारुति और हीरोहोंडा दोनों ही गाड़ी बनाने वाली कंपनियां हैं. ठीक ऐसे ही JCB एक मशीन बनाने वाली कंपनी है. जिसे हम जेसीबी कहते उस मशीन का नाम   ‘Backhoe Loader’ है.

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मशीन के नाम के पीछे की कहानी
अब सवाल है कि  ‘Backhoe Loader’ का नाम कहां से सामने आया. दरअसल,  ‘Backhoe Loader’ मशीन दोनों तरफ से काम करती है. एक और इसे चलाने के लिए स्टेयरिंग मौजूद होता है, तो वहीं दूसरी ओर यह कई किस्म के लीवर्स से संचालित होती है. ऐसे ही मशीन के आगे पीछे, दो यंत्र भी लगे होते हैं. एक तरफ बकैट लगा होता है, जो  Backhoe से जुड़ा होता है. वहीं, दूसरी ओर लोडर लगा होता है. दोनों को मिलाकर इसे Backhoe Loader कहा जाता है.

भारत में कहां बनती ये मशीन
जेसीबी इंडिया की पांच फैक्ट्रियां भारत में मौजूद हैं. वहीं, एक नई फैक्ट्री गुजरात में बन रही है. खास बात है कि भारत से ये कंपनी दुनिया के 110 देशों में Backhoe Loader निर्यात किया जाता है. वहीं ये कंपनी इसके अलावा  Compactors, Excavators, generators, Mini Excavators, Skid Steer Loaders जैसी मशीने भी बनाती है. 

क्या है स्वेज नहर का मामला 
एशिया और यूरोप के बीच व्यापर की बड़ी कड़ी स्वेज नहर 23 मार्च से बंद है. दरअसल, तेज हवाओं के चलते एवर गिवन (EVER GIVEN) नाम का जहाज नहर में तिरछा फंस गया. इसमें सवार सभी चालक दल भारतीय हैं. इसकी वजह से हर घंटे ग्लोबल ट्रेड को 40 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है. कमाल की बात है कि 150 सालों से स्वेज नहर में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है. 

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