Amit Shah और Sharad Pawar की कथित मुलाकात पर महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक अटकलों का दौर जारी, समझिए वजह


नई दिल्ली: सत्ता की सियासत सिर्फ पश्चिम बंगाल (West bengal) में ही नहीं गरम है. महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी बड़ी सियासी सरगर्मी छाई है. खासकर अमित शाह (Amit Shah) और शरद पवार (Sharad Pawar) की कथित मुलाकात को लेकर बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक तरह-तरह की खबरें उड़ रहीं हैं. अहमदाबाद में शाह और पवार की भेंट को लेकर राजनीतिक अटकलों का दौर भी तेज हो गया है. हालांकि न तो एनसीपी (NCP) मानने को तैयार है कि शाह और पवार में मुलाकात हुई वहीं न ही बीजेपी (BJP) ये कह रही है कि मुलाकात हुई है.

कथित मुलाकात के क्या मायने?

लेकिन अगर इन घटनाक्रमों की टाइमिंग और बयानों पर गौर करें तो अमित शाह से लेकर एनसीपी के नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) और फिर शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) जिस तरह बयान दे रहे हैं और मीटिंग के ठीक बाद पवार के बीमार होने की खबरें सामने आई हैं. उससे पॉलिटिकल सेटिंग गेटिंग को लेकर भी चर्चाओं चल रहीं हैं तो आइए आपको बताते हैं कि शाह-पवार की इस कथित मुलाकात के क्या मायने और असर हो सकते हैं.

शरद पवार को हिंदुस्तान की राजनीति का सुपर सियासी चेहरा माना जाता है वहीं दूसरी ओर अमित शाह की गिनती न्यू इंडिया के पॉटिकिल चाणक्य के तौर पर होती है. इन दोनों को एक ही मंच पर शायद ही आपने कभी देखा होगा और यही वजह हो सकती है कि दोनों की एक मुलाकात की खबर ने देश भर की सियासत में हलचल मचा दी है. इसमें दो बातों की बड़ी चर्चा है जिसमें एक के फ्लैश प्वाइंट में महाराष्ट्र है तो दूसरे में बंगाल. पवार और शाह की कथित मुलाकात का राजनीतिक अनुमान इन्हीं दो राज्यों के हालात को लेकर लगाया जा रहा है. 

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सारा खुलासा जरूरी नहीं: शाह

ये अनुमान क्यों लगाए जा रहे हैं उसकी वजह समझिये. पवार से कथित मुलाकात को लेकर अमित शाह कहते हैं कि सारा खुलासा ज़रूरी नहीं है. एनसीपी तो मुलाकात की खबरों को ही खारिज कर रही है. शिवसेना कहती है कि अगर मिल भी लिये तो क्या हुआ. इस बयान से इतर दो जरूरी सवाल ये भी थे कि क्या पवार और शाह की मुलाकात अहमदाबाद में हुई या नहीं हुई. दूसरा सवाल मुलाकात हुई तो क्यों हुई. इसके जवाब में शाह मुस्कुराते हुए कहा, ‘सब कुछ सार्वजनिक नहीं करूंगा.’ मतलब न तो शाह ने मुलाकात की खबर को सिरे से नहीं नकारा और न ही शिवसेना ने मुलाकात को लेकर चल रही खबरों पर कुछ ऐतराज जताया. 

पर्देदारी करती दिखी एनसीपी

लेकिन एनसीपी शुरू से ही इस पूरे प्रकरण पर पर्देदारी करती दिखी. एनसीपी तो मुलाकात की बात मानने तक को तैयार नहीं. नवाब मलिक ने तो ये भी कह दिया कि बीजेपी भ्रम फैला रही है. अब एनसीपी के ना नुकुर वाले रुख के पीछे जो वजह देखी जा रही है. उसकी पृष्ठभूमि के बारे में समझिये. दरअसल सचिन वझे कांड और अनिल देशमुख पर लगे 100 करोड़ की वसूली का आरोप तो एनसीपी पर है पर इसका दबाव शिवसेना ही झेल रही है.

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शिवसेना के लिए तो पूरी सत्ता दांव पर लगी है. एनसीपी नेता की करतूत के दबाव में शिवसेना ने तो अपने होम मिनिस्टर अनिल देशमुख को एक्सिडेंटल होम मिनिस्टर तक कह दिया है. और तीन दलों की इस सियासी सिरफुटौव्वल के बीच बीजेपी को अपर हैंड खेलने का मौका मिला है. इसी गेम का एक चैप्टर अहमदाबाद में भी लिखा गया लगता है. 

मीटिंग के 2 मकसद!

शाह-पवार की कथित मीटिंग का सेंटर प्वाइंट महाराष्ट्र को माना जा रहा है. मौजूदा हालात में ये सही भी लगता है क्योंकि वझे-देशमुख कांड में एनआईए की जांच के बाद हो रहे खुलासे महाराष्ट्र अघाड़ी (MVA) सरकार की सेहत के लिए नुकसानदायक दिख रहे हैं. लेकिन इस मुलाकात के बाद जो घटनाएं हुईं उससे शक बढ़ता है कि कहीं अहमदाबाद वाली मीटिंग के तार बंगाल चुनाव से तो नहीं जुड़े हैं. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि शाह और पवार की कथित मुलाकात का खुलासा होने के बाद अचानक शरद पवार के बीमार होने की खबर आ गई. उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. एनसीपी ने दावा किया कि पवार बीमार हैं और सर्जरी की जरूरत है.

वैसे ये इत्तेफाक भी हो सकता है लेकिन शरद पवार के बीमार होने के बाद बंगाल में उनके सारे चुनावी कार्यक्रम रद्द कर दिये गए हैं. 

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बंगाल कनेक्शन!

शरद पवार का एक अप्रैल से शुरू होने वाला तीन दिन का पश्चिम बंगाल दौरा रद्द कर दिया गया है. पवार इस दौरे में बीजेपी के खिलाफ कई रैलियां करने वाले थे. ममता बनर्जी से मुलाकात करने वाले थे और टीएमसी भवन में तृणमूल कार्यकर्ताओं की सभा भी करने वाले थे. मतलब शरद पवार अब बीजेपी के खिलाफ और ममता बनर्जी  के समर्थन में कोई चुनाव प्रचार नहीं करेंगे. इसीलिये अनुमान लगाया जा रहा है कि अहमदाबाद वाली कथित मुलाकात का कनेक्शन बंगाल चुनाव से भी हो सकता है.

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