July 26, 2021

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सरपंच, सचिव के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए MP सरकार का बड़ा फैसला, आम आदमी को मिलेगी ये ताकत


भोपालः मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने पंचायतों को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि अब प्रदेश के किसी भी पंचायत में होने वाले भ्रष्टाचार की जानकारी और इन मामलों में दोषी पदाधिकारियों को पद से हटाने की कार्रवाई की पूरी सूचना पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी. इसके अलावा इन प्रकरणों में पदाधिकारियों से शासकीय राशि की वसूली की तमाम जानकारी भी आम जनता को दी जाएगी. 

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने किया जा रहा प्रयास 
एमपी सूचना विभाग के आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि यह प्रयास पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अब अगर कोई सरपंच, पंचायत सचिव या फिर पंचायत विभाग से जुड़ा कोई दूसरा अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया जाता है, तो उसकी पूरी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड होगी. ताकि यह जानकारी आम आदमी को पता चल सके. उन्होंने कहा कि इस फैसले को लागू करने के निर्देश पंचायत राज संचालनालय की तरफ से जारी कर दिए गए हैं. 

किन धाराओं के तहत होती है पंचायत में कार्रवाई 
दरअसल, पंचायत विभाग के कामों में किसी भी प्रकार की सरकारी राशि में गबन करने पर मध्य प्रदेश के सभी पंचायतों में अगर कोई पदाधिकारी या जनप्रतिनिधी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ मध्य प्रदेश के पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 और 92 के तहत कार्रवाई की जाती है. धारा-40 पंचायत के पदाधिकारियों को हटाने के संबंध में रहती है, जबकि धारा 92 के तहत गबन की गई सरकारी राशि की वसूली का प्रावधान है.

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जानकारी सार्वजनिक करने से क्या असर होगा 
दरअसल, अब तक पंचायत स्तर पर अक्सर राजनीतिक दवाब के चलते भ्रष्टाचार के मामले सिर्फ फाइलों तक सीमित होकर रह जाते थे. लेकिन अब यह जानकारी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर आने से पंचायत राज व्यवस्था में कसावट के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोधी पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी. इस आदेश के बाद मप्र के जिले से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक पंचायतों में भ्रष्टाचार से संबंधित की गई कार्रवाई को कंप्यूटर पर एक क्लिक के जरिए कोई भी आम आदमी देख सकेगा. जबकि ऐसा होने से उसे अपने पंचायत में क्या चल रहा है इसकी भी पूरी जानकारी रहेगी. यही वजह है कि इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है. 

इस शिकायत के बाद लिया गया फैसला 
दरअसल, रीवा जिले के सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने पंचायत विभाग में हो रही कार्रवाई को प्राप्त करने के लिए आरटीआई दाखिल की थी. इसके बाद भी उन्हें यह जानकारियां नहीं मिल पाई. जिसके बाद उन्होंने इस पूरे प्रकरण की शिकायत पंचायत विभाग में कर दी. इसमें उन्होंने रीवा जिले एवं अन्य जिलों में भी इस तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात राज्य सूचना आयोग को बताई, जिसके बाद राज्य सूचना आयोग ने पंचायत विभाग की जानकारी सार्वजनिक करने का फैसला लिया है. 

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