DNA ANALYSIS: भारत-पाकिस्‍तान के रिश्‍तों में बड़े बदलाव के संकेत, 5 Points में समझें ये बातें


नई दिल्‍ली: आज हम भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में आई नरमी का विश्लेषण करेंगे. भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में कटुता अब धीरे-धीरे कुछ कम होती दिख रही है और संभव है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों को लेकर आपको कोई बड़ी खबर मिल सकती है. इसके संकेत भारत से लगभग दो हजार किलोमीटर दूर ताजिकिस्‍तान में देखने को मिले.

भारत-पाकिस्तान के रिश्‍तों में कम हो रही कड़वाहट

ताजिकिस्‍तान की राजधानी दुशांबे (Dushnbe) में 29 और 30 मार्च को हार्ट ऑफ एशिया समिट का आयोजन हुआ था, जिसमें 50 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी इसमें शामिल हुए और इस दौरान एक ग्रुप फोटो के समय दोनों नेता एक दूसरे से कुछ ही दूरी पर खड़े थे. हालांकि दोनों ही नेता एक दूसरे से नजरें चुराते भी नजर आए और कुछ ही दूरी पर खड़े होने के बावजूद उन्होंने एक दूसरे से हाथ भी नहीं मिलाए. इन तस्वीरों की अब काफी चर्चा हो रही है.

-यहां सबसे बड़ी बात ये है कि पहली बार इस तरह के समिट में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने एक दूसरे पर आरोप नहीं लगाए और इसे दोनों देशों के रिश्तों के बीच बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जिसका जिक्र पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी किया.

-देश के पहले अंतरराष्ट्रीय न्‍यूज़ चैनल WION ने इस समिट के दौरान उनसे बात की, जिसमें शाह महमूद कुरैशी का रुख भारत को लेकर काफी सकारात्मक दिखा और इसी वजह से हम आपसे ये कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देशों को लेकर आपको कोई बड़ी खबर मिल सकती है.

-पाकिस्तान के विदेश मंत्री की इन बातों से आप समझ सकते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में कटुता कम हो रही है. इसे आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा एक दूसरे को लिखी गई चिट्ठी से भी समझ सकते हैं.

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों 23 मार्च को इमरान खान को एक चिट्ठी लिखी थी और उस दिन पाकिस्तान दिवस भी था. इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा था कि भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते चाहता है और इसके लिए जरूरी है कि ऐसा माहौल तैयार किया जाए, जिसमें भरोसा हो आतंकवाद और दुश्मनी के लिए कोई जगह न हो.

-पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 29 मार्च को इस चिट्ठी का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण रिश्तों का समर्थन किया और ये भी लिखा कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान अपने सभी विवादों और मतभेदों को शांति से सुलझाएं.

इन दोनों चिट्ठियों से यही संकेत मिलते हैं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी बर्फ़ थोड़ी बहुत पिघलनी शुरू हो गई है. हालांकि अब भी रिश्ते सुधरे नहीं है. ये बस कुछ ऐसे संकेत हैं, जो बड़े बदलावों की तरफ इशारा कर रहे हैं. इसे आप पाकिस्तान की सरकार के 31 मार्च को किए फैसले से भी समझ सकते हैं.

भारत से व्‍यापार को ग्रीन सिग्‍नल

कल 31 मार्च को पाकिस्तान ने भारत से कपास और शुगर के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है. हालांकि ये रोक फिलहाल 3 महीने के लिए ही हटाई गई है.

इसका मतलब है कि पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो व्यापार के दरवाजे बंद हो गए थे, उन्हें फिर से खोलने की कोशिशें शुरू हो गई है. इसे आप इस टाइमलाइन से भी समझ सकते हैं.

-2019 में जब पुलवामा में CRPF जवानों के काफिले पर आतंकवादी हमला हुआ था, तब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे और तब भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक भी की थी.

-पुलवामा हमले के बाद जब 5 अगस्त 2019 को भारत ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया, तब पाकिस्‍तान ने भारत से अपने सभी रिश्ते तोड़ लिए थे और दोनों देशों के बीच व्यापार भी बंद हो गया था.

-ये स्थिति लगभग डेढ़ वर्षों तक बनी रही. लेकिन फरवरी के महीने में इसमें कुछ बदलाव आना शुरू हुआ.

-12 फरवरी 2021 को यानी पुलवामा हमले के करीब करीब दो साल बाद पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने अपने एक बयान में भारत के साथ शांतिपूर्ण रिश्तों की बात कही. तब भारत ने इस बयान का स्वागत किया था. 

-इसके बाद 24 फरवरी की रात से भारत और पाकिस्तान ने एक बार फिर से 2003 की युद्ध विराम संधि का पालन करना शुरू कर दिया. इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर सीजफायर का पालन करेंगी.

-10 मार्च को खबर आई कि भारत पाकिस्तान को साढ़े चार करोड़ मेड इन इंडिया वैक्सीन देगा और फिर 22 मार्च को पाकिस्तान के अधिकारियों का एक दल परमानेंट इंडस कमीशन की बैठक के लिए भारत पहुंचा, जो बहुत बड़ी खबर थी और 31 मार्च को पाकिस्तान ने भारत से कपास और चीनी के निर्यात पर लगी रोक भी हटा ली है. बड़ी बात ये है कि ये रोक वर्ष 2016 में लगाई गई थी और पूरे पांच साल बाद हटाई गई है.



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