इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ जंग छेड़ रहा China, खुले तौर पर ढाए जा रहे हैं जुल्म


बीजिंग: सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने हमेशा समाज के हर उस पहलू का विरोध किया है, जिससे चीनी नागरिकों के बीच उसकी प्रधानता को चुनौती मिलने का खतरा हो. शी जिनपिंग (Xi Jinping) के नेतृत्व वाली सीसीपी अपनी तानाशाही के लिए धर्म को एक बड़े खतरे के रूप में देखती है. पार्टी को डर है कि चीनी जनता के मस्तिष्क में सीसीपी की जगह धर्म ले सकता है और अंततः सत्ता पर उसके एकाधिकार पर खतरा पैदा कर सकता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए सीसीपी ने अलग-अलग तरीकों से लोगों के बीच पार्टी के वर्चस्व को थोपने की कोशिश की है और उन लोगों पर खुले तौर पर जुल्म ढाए हैं, जो सीसीपी को अपने विश्वास और धर्म से ऊपर मानने से इनकार करते हैं.

चीन में मुस्लिमों को करना पड़ता है जुल्म का सामना

ऐसे तो चीन और उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में कई धर्म प्रचलित हैं, पर खास तौर पर इस्लाम को मानने वाले लोगों को सबसे अधिक उत्पीड़न और जुल्म का सामना करना पड़ता है. चीन में इस्लाम को मानने वाले लोग मुख्य रूप से उइगर और कुछ अन्य जातीय अल्पसंख्यक हैं, जो अधिकृत पूर्वी तुर्किस्तान (शिनजियांग) में रहते हैं. दशकों से चीन ने उइगर मुसलमानों और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाने के लिए निगरानी, कारावास, अलगाववाद, आतंकवाद से लड़ाई और पुनर्शिक्षण जैसे बहानों का सहारा लिया है. उनकी नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को छीन लिया गया है और यहां तक कि धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने भर से नागरिकों को उनके परिवार सहित कैदखानों (डिटेंशन कैंप्स) में बंद कर दिया जाता है, जिन्हें चीनी ‘पेशेवर प्रशिक्षण केंद्र’ बताते हैं.

ये भी पढ़ें- भारत के साथ व्‍यापार शुरू करने की घोषणा के 24 घंटे के भीतर पाकिस्‍तान क्‍यों पलटा?  

लाइव टीवी

2012 के बाद तेज हुए मुसलमानों के खिलाफ अभियान

2012 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के सीसीपी महासचिव के रूप में उदय के साथ अल्पसंख्यक मुसलमानों के खिलाफ अभियान और तेज हो गए हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, सीसीपी ने शिनजियांग के बड़े हिस्से में व्यापक तौर पर ट्रैकिंग प्रणाली लागू किया है, जो सरकारी अधिकारियों को उइगरों को ट्रैक करने और उनकी निगरानी करने की सहुलियत देता है. चीन सरकार का मानना है कि इसके माध्यम से वे ‘संदिग्ध व्यवहार’ करने वाले उइगरों की पहचान कर सकेंगे.  इस जन-निगरानी प्रणाली की मदद से चीन ने दस लाख से अधिक उइगरों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के नजरबंदी शिविरों में मनमाने ढंग से हिरासत में रखा है.

मुसलमानों को धार्मिक कार्य करने से रोका जाता है

शिनजियांग और चीन के अन्य हिस्सों में रहने वाले मुसलमानों को धार्मिक कार्य करने से रोका जाता है और ऐसे करते हुए पाए जाने पर चीनी अधिकारियों द्वारा उन पर कार्रवाई की जाती है. अपने व्यापक निगरानी नेटवर्क का उपयोग करके वे लगातार शिनजियांग में मुसलमानों की निगरानी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मुसलमान अपने धर्म का पालन नहीं करें. उइगरों के अलावा चीन में एक अन्य बड़ा मुस्लिम जातीय समूह ‘हुई’ मुसलमानों का है, जो बहुसंख्यक हान आबादी से करीबी तौर पर जुड़े हुए हैं. परंपरागत रूप से शिनजियांग के बाहर हुई और अन्य मुस्लिम समूहों को उइगुरों की तुलना में अधिक धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त रही है.

2017 के बाद 20 लाख मुसलमानों को हिरासत में लिया गया

हाल के वर्षों में इन समूहों ने भी चीनी अधिकारियों द्वारा अपने विश्वास और धार्मिक स्वतंत्रता के दमन में तेजी से वृद्धि देखी है. चीनी अधिकारियों द्वारा दमनकारी कार्रवाइयों में धार्मिक नेताओं की मनमाने तरीके से कैद और मस्जिदों को जबरन बंद करना और ढहाया जाना भी शामिल है. काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 के बाद से चीनी अधिकारियों द्वारा करीब 20 लाख मुसलमानों को हिरासत में लिया गया है. चीनी सरकार ने दावा किया है कि बंदियों को ‘पुनर्शिक्षण’ शिविरों में रखा गया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे सबूतों से साफ पता चलता है कि बंदियों को यातनाएं दी जाती हैं, यौन शोषण किया जाता है, धर्म का पालन करने से रोका जाता है, और सीसीपी के प्रति वफादारी की प्रतिज्ञा लेने के लिए मजबूर किया जाता है.

चीन ने मानवाधिकार उल्लंघन को हमेशा नकारा

चीनी सरकार ने इन शिविरों में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को बार-बार नकारा है और कहा है कि शिविरों में केवल दो कार्य होते हैं. पहला है मंदारिन, चीनी कानून, और व्यावसायिक कौशल सिखाना और दूसरा, चरमपंथी विचारधाराओं पर अंकुश लगाना. अपने नागरिकों को इस्लाम का अभ्यास करने से रोकने के लिए चीनी सरकार ने कई मनमाने नियम और कानून लागू किए हैं. थोपे गए इन नियमों के उल्लंघन पर लोगों को चीन के ‘पुनर्शिक्षण शिविरो’ में भेज दिया जाता है, जहां से वापसी नामुमकिन होती है.  शिनजियांग और चीन के अन्य हिस्सों में 16 साल या उससे कम उम्र के युवाओं को पवित्र कुरान पढ़ने की अनुमति नहीं है. चीनी सरकार ने लंबी दाढ़ी और बुर्के पर भी पाबंदी लगा रखी है. ज़ुल्म और बंदिशों का आलम यह है कि शिनजियांग के उइगरों को मन-मुताबिक नाम रखने की भी आजादी नहीं दी गई है.

दुनिया के अधिकांश इस्लामी हितधारक चीन के खिलाफ चुप

इस्लाम के खिलाफ चीन के अत्याचारों पर लगातार सामने आते सबूतों के बावजूद, इस्लामी दुनिया के अधिकांश हितधारक चुप रहे हैं और इन उल्लंघनों को जारी रहने दे रहे हैं. इस्लामिक जगत को चुप रखने के लिए चीन मुस्लिम बहुल देशों के के साथ-साथ अफ्रीका, दक्षिण एशिया, और दक्षिण-पूर्वी एशिया के पत्रकारों और राजनयिकों को शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र बुलाकर उनकी आवभगत करता है. सुनियोजित तरीके से इन विदेशी राजनयिकों और पत्रकारों को क्षेत्र में स्कूलों और पेशेवर प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा कराया जाता है. वास्तव में, यह सभी गतिविधियां उस पटकथा के भाग हैं, जिनमें दौरों के समय उन्हें केवल वही दिखाया जाता है जो सीसीपी उन्हें दिखाना चाहती है. इससे बीजिंग न केवल देशों से सद्भावना प्राप्त करता है, बल्कि, सच्चाई को सामने आने से भी रोक देता है. इसके अलावा, चीन धार्मिक और सांस्कृतिक कूटनीति का भी सहारा लेता है, जिसके अंतर्गत चीनी अधिकारी मुस्लिम बहुल देशों की लगातार यात्राएं करते हैं जिससे मुस्लिम-अनुकूल राष्ट्र के रूप में चीन की छवि पेश की जा सके.



BellyDancingCourse Banner

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *