Jaipur News: कोरोना काल में भी खूब छलका आबकारी विभाग का खजाना, फिर भी लक्ष्य से दूर!


Jaipur: वित्तीय वर्ष 2020-21 खत्म हो चुका है. आबकारी विभाग (Excise Department) की तमाम कोशिशों के बाद कोरोना काल (Covid Era) के दौरान पिछले वित्तीय वर्ष में उम्मीद से ज्यादा खजाना तो छलका लेकिन टारगेट पूरा करने में पिछड़ गया हालांकि 2019-20 के मुकाबले 2020-21 के वित्तीय वर्ष (कोरोनाकाल) में खूब जाम छलकने से राजस्व ज्यादा अर्जित हुआ है.

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कोरोना संक्रमण (Corona infection) और लॉकडाउन (Lockdown) में भले ही लोगों की जिंदगी की रफ्तार धीमी कर दी हो लेकिन आबकारी विभाग के राजस्व का मीटर ‘संकट के काल’ में भी तेजी दौड़ा हालांकि ये मीटर वित्तीय वर्ष 2020-21 के टारगेट से 15 फीसदी पीछे ही रूक गया. आबकारी विभाग के आंकडों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 के मुकाबले वर्ष 2020-21 में भी खूब जाम छलके. 2019-20 में जहां विभाग को 10 हजार 500 के लक्ष्य के मुकाबले 9 हजार 591 करोड़ का राजस्व मिला. वहीं 2020-21 में 9 हजार 751 करोड़ का राजस्व मिला, जिसमें 1 अप्रैल से 3 मई तक करीब 33 दिन शराब की दुकानें बंद रहीं.

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जब दुकानें खुली तो लंबी-लंबी कतारें मधुशालाओं के बाहर सुरप्रेमियों की देखने को मिली. सरकारी आंकडों पर नजर डाले तो 2020-21 में मार्च माह में सबसे ज्यादा राजस्व 1 हजार 491 करोड़ का प्राप्त हुआ, जिसमें 31 मार्च को सिर्फ एक दिन में 164 करोड़ राजस्व मिला. आबकारी आयुक्त डॉक्टर जोगाराम के मुताबिक सरकार का नशे के कारोबार से वित्तीय वर्ष 2020-21 में 12 हजार 500 करोड़ रुपये का टारगेट दिया, जिसे कोरोना के चलते घटाकर 11 हजार 500 करोड़ किया लेकिन विभाग तमाम कोशिशों के बाद टारगेट का 85 फीसदी ही राजस्व अर्जित कर पाया.

 

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क्या कहना है आबकारी आयुक्त डॉक्टर जोगाराम का
आबकारी आयुक्त डॉक्टर जोगाराम के मुताबिक, लॉकडाउन हटने के बाद विभाग के सामने वित्तीय वर्ष में 11 हजार 500 करोड़ के भारी भरकम टारगेट को अचीव करना बडी चुनौती का काम रहा. कोरोना संक्रमण के व्यापक प्रभाव का असर हर ओर देखने को मिला. ऐसे कठिन समय में भी विभाग ने बेहतर प्लानिंग से लक्ष्य का 85 फीसदी राजस्व अर्जित किया. जिला आबकारी अधिकारियों के साथ लगातार संवाद, डांट फटकार का असर रहा कि टारगेट के करीब पहुंचने में सफलता मिली. कोरोना के व्यापक असर के बाद भी आबकारी विभाग ने जून 2020 से मार्च 2020 तक रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है. लॉकडाउन के कारण जहां अप्रैल के महीने में शराब की दुकानें बंद रहीं तो वहीं मई में भी कोरोना से शराब व्यवसाय प्रभावित रहा. लॉकडाउन हटने और जनजीवन सामान्य होने के बाद आबकारी विभाग के सामने अप्रैल और मई महीने के नुकसान की भरपाई की भी चुनौती थी, जिससे विभाग ने अच्छी तरह से पार पाई है.

बहरहाल, कोरोना काल की बड़ी चुनौतियों के बीच भी जिस तरह से आबकारी विभाग ने राजस्व अर्जन में रफ्तार पकड़ी है वह काबिले तारीफ़ है. आबकारी आयुक्त जोगाराम भविष्य की प्लानिंग भी कोरोना को ध्यान में रखखर ही तैयार कर रहे हैं. ऐसे में उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में भी विभाग इसी तरह से प्रदर्शन जारी रखेगा.



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