July 30, 2021

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और कुछ नहीं

बिहार के बाहुबली पप्पू यादव को हुआ था दोस्त की बहन से इश्क, बड़ी मजेदार है इनकी प्रेम कहानी


Patna: बिहार की सियासत में जब भी बाहुबली सियासतदानों का जिक्र होगा, तो उसमें राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का नाम शीर्ष की पंक्तियों में आएगा. एक बार विधायक और 5 बार सांसद रहे पप्पू यादव के सियासी किस्से जितने मशहूर रहें है, उतनी ही मशहूर है उनकी प्रेम कहानी.

या यूं कह लीजिए कि इनकी प्रेम कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. एक मामले में जेल पहुंचे तो प्यार में गिरफ्तार होकर बाहर निकले. दरअसल, बात साल 1991 की है जब पप्पू को लोग बाहुबली नेता के रूप में जानते थे. पप्पू राजनीतिक हत्या के आरोप में (बाद में कोर्ट ने इन्हें इससे बरी कर दिया) पटना की एक जेल में थे. इस दौरान वे अकसर जेल अधीक्षक के घर से लगे मैदान में लड़कों का खेल देखा करते थे.

इन लड़कों में विक्की नाम का एक लड़का भी था. खेल के दौरान विक्की की पप्पू के साथ जान पहचान हुई और देखते-देखते वो जान पहचान दोस्ती में बदल गई. इसी दोस्ती के चलते विक्की ने एक बार पप्पू को अपनी फैमिली एलबम दिखा डाली जिसमें विक्‍की कि बहन रंजीता की टेनिस खेलती हुई एक तस्वीर थी.

हम तो फना हो गए
उनकी आंखे देखकर गालिब
न जाने वो आइना कैसे
देखते होंगे

गालिब का ये शेर पप्‍पू यादव कि उस वक्त की स्थिति पर एकदम फिट बैठता है. रंजीता की उस तस्वीर को देखकर ही पप्‍पू अपना दिल हार बैठे और फिर शुरू हुई अपने प्रेम प्रस्ताव को लेकर रंजीता तक पहुंचने की लंबी कहानी. रंजीता उस समय टेनिस खेला करती थीं. जेल से छूटने के बाद पप्पू अकसर रंजीता की एक झलक पाने के लिए उनके पीछे जाया करते थे. पीछा करने का ये सिलसिला लगभग तीन सालों तक चला. पप्पू अकसर कामकाज छोड़कर रंजीता की एक झलक पाने उनके पीछे निकल पड़ते.

किसी को भी वोट मिले,
किसी का भी प्रचार हो,
बस तू मेरा रहे, इस दिल में तेरी ही सरकार हो.

कुछ ऐसा ही हाल उस वक्त बाहुबली पप्‍पू का था. पप्पू लगातार रंजीता का पीछा करते रहें. तीन साल बाद रंजीत को जब इस बात का आभास हुआ तो उन्हें पप्‍पू का अपने पीछे आना रास नहीं आया. उन्होंने पप्पू यादव को कई बार ऐसा करने के लिए मना किया. पप्‍पू नहीं माने तो कड़े शब्दों में रंजीता ने इसका विरोध भी किया. एक बार तो रंजीता ने यहां तक कह दिया कि वे सिख हैं और पप्पू हिंदू, उनके परिवार वाले ऐसा होने नहीं देंगे.

लेकिन पप्पू हार मानने वालों में से कहां थे, जिद पर डटे रहे. रंजीता के माता पिता ग्रंथी थे और इस विवाह के खिलाफ थे. आलम यूं हुआ कि इश्क को मुकम्मल करने की जिद पप्पू को चंडीगढ़ तक ले गई. वहां पप्पू रंजीता के बहन-बहनोई से मिले, लेकिन जब वहां भी दाल नहीं गली तो हताश-परेशान होकर उन्होंने एक बार नींद की ढेरों गोलियां खा ली. किसी ने ठीक ही कहा है कि-

‘जो इश्क तकलीफ न  दे वो इश्क कैसा,
और जो इश्क में तकलीफ न सहे वो आशिक कैसा’

खैर, स्थिति बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया. इसके बाद रंजीता का व्यवहार थोड़ा सामान्य हुआ और फिर बात आगे बढ़ी. पप्पू लगातार रंजीता के माता-पिता को मनाने का प्रयास करते रहे इस बीच राजनीति में मुकाम बना चुके पप्पू को पता चला कि कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया की बात रंजीता का परिवार कभी नहीं टालेगा. फिर क्या था, पप्पू ने दिल्ली जाकर अहलूवालिया से मदद की गुहार लगाई जिसके बाद रंजीता के घर वाले भी मान गए.

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आखिरकार शादी की तैयारियां हुई और तय किया गया कि पप्पू और रंजीता की शादी आनंद मार्ग की पद्धति से होगी. इस दौरान पूर्णिया की सड़कों को पूरी तरह सजा दिया गया. शहर के सारे होटल और गेस्ट हाउस बुक थे. आम और खास सबके लिए व्यवस्था की गई. पर क्या ये हैप्पी एन्डिंग थी? जवाब है ‘नहीं.’

सयाने लोग कह गए हैं –
‘इश्क में ‘पापड़ बेलने’ के साथ, कभी- कभी ‘गुजियां’ और ‘समोसे’ भी तलने पड़ते हैं’

तो हुआ यूं कि रंजीता और उनके परिजनों को लेकर आ रहा चार्टर्ड विमान रास्ता भटक गया. दुल्हन के शादी में नहीं पहुंचने के कारण हंगामा मच गया. लेकिन जब बाद में पता चला कि विमान का पायलट रास्ता भटक गया है तब जाकर पप्पू ने चैन की सांस ली, फिर और देरी ना करते हुए दोनों की शादी बड़ी धूमधाम से की गई. इस शादी में चौधरी देवीलाल, लालू प्रसाद, डीपी यादव और राज बब्बर भी शामिल हुए.

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आज भी उन दिनों की बातें याद करके पप्पू यादव का चेहरा खिल उठता है. प्रेमिका से पत्नी बनीं और अब राजनीति में उनकी सहचर रंजीता रंजन के लिए पप्पू के पास सिर्फ सराहना के शब्द हैं.

(इनपुट-श्रेया त्यागी)





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