June 18, 2021

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Israel ने मास्‍क को कहा-BYE, खोले स्‍कूल, पढ़ें कोरोना को मात देने की INSIDE STORY


नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) से जहां भारत समेत कई देशों में हाहाकार मचा हुआ है वहीं, इजराइल (Israel) दुनिया का इकलौता ऐसा देश बन गया है जिसने लोगों को मास्क न पहनने को कहा है. साथ ही इजराइल ने स्कूलों को भी खोलने का फैसला कर लिया है. 

आपको बता दें कि इजराइल में 81 फीसदी जनता को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है. सरकार के इस आदेश के बाद लोगों ने अपने चेहरे से मास्क उतार फेंका है और सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं. Zee News ने इस बारे में इजराइल की डेप्युटी चीफ ऑफ मिशन (Deputy Chief of Mission) Rony Yedidia-Clein से बातचीत की.

सवाल- जहां भारत में कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक होती जा रही है, वहीं इजराइल ने स्कूलों को खोल दिया है और मास्क लगाने की बंदिशें हटा दी हैं. इसपर आपका क्या कहना है, ये सब कैसे मुमकिन हुआ?  
जवाब- इजराइल में भी कोरोना की कई वेव आईं जो काफी खतरनाक थीं. इजराइल एक छोटा देश है लेकिन इसके बावजुद कोरोना से प्रभावित हुए लोगों की संख्या ज्यादा रही. हमने वैक्सीनेशन ड्राइव को तेजी से शुरू किया जिसमें सबसे पहले 65 साल से ऊपर के लोगों को फिर 35 साल के ऊपर और फिर 16 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन दिए गए. हमारे देश में हेल्थ सिस्टम डिजिटलाइज है जिसकी वजह से जो भी एलीजिबल होता था टीके के लिए उसे ऑटोमेटिक संदेश आते थे, संदेश के माध्यम से उसे टीका लगाने के लिए कहा जाता था. ये काम इजराइल में काफी तेजी से हुआ. जिसकी वजह से आज हमें ये बताते हुए काफी खुशी हो रही है कि अब हमारे देश में मास्क पहनना जरूरी नहीं रहा.

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सवाल- इजराइल ने जबसे अपने नागरिकों के लिए वैक्सीनेशन शुरू किया मौत के आंकड़ों में काफी कमी आई और अर्थव्यवस्था नॉर्मल हो गई? क्या कहेंगी?

जवाब- हां ये सच है. हम इसे लेकर काफी खुश हैं क्योंकि हमने कोरोना वायरस को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है, लेकिन हम अभी भी काफी सतर्क हैं. इजराइल में अब भी एक जगह पर ज्यादा लोगों को इकठ्ठा होने की मनाई है. किसी तरह की मास गैदरिंग न हो इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं. हम खुश हैं लेकिन सतर्क भी हैं.

सवाल- इस वायरस से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्कूल खुलने के साथ-साथ मास्क हटाने का फैसला इजराइल का एक Calculated Risk है! इसपर आपका क्या कहना है? 
जवाब- ये बात सच है कि ये एक कैल्कुलेटेड रिस्क है क्योंकि इस वायरस से लोगों को काफी मुश्किल हुई. लोगों के रोजगार पर असर पड़ा. देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा. ये सब जानते हुए हमने रिस्क लिया है ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्यादातर लोगों को वैक्सीन की डोस लग चुकी है.

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सवाल- भारत में भी काफी लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है. क्या आपको लगता है कि इजराइल की तरह भारत भी काभी मास्क फ्री हो सकता है?
जवाब- मुझे इस बात की खुशी है कि भारत में तेजी से वैक्सीन लगाई जा रही है. भारत में 1 मई से 18 साल के ऊपर आयु के लोगों को वैक्सीन लगेगी. वैक्सीन से किसी को डरने की जरूरत नहीं है. जब आपका नंबर आए जाइए और वैक्सीन लगवाइए. मैं खुद वैक्सीन लगवा चुकी हूं, मेरा परिवार भी वैक्सीन लगवा चुका है.

सवाल- जिस तरह से इजराइल ने कोविड से डील किया है उससे भारत क्या सीख सकता है?
जवाब- भारत हमारी गलतियों से सीख ले सकता है. हमारे देश में कुछ बड़े पैमाने पर Mass Gathering हुई. कई धार्मिक या राष्ट्रीय कार्यक्रमों में लोग शामिल हुए जिससे वायरस को तेजी से फैलने में मदद मिली. इंडिया और इजराइल के संबंध काफी पुराने हैं और इजराइल भारत की मदद के लिए हर वक्त तैयार है. 

सवाल- कोविड के खिलाफ लड़ाई में इजराइल भारत की किस तरह मदद कर रहा है?
जवाब- भारत और इजराइल के संबंध काफी मजबूत हैं. हम इस लड़ाई में भारत की पूरी मदद कर रहे हैं. उन्नत तकनीक को भारत के साथ साझा किया गया है. AIIMS और Primus हॉस्पिटल को भी इजराइल की तरफ से ऐसी कई टेक्नोलॉजीज शेयर की गईं हैं. तमिलनाडु को Respiratory Systems दिए गए. कोविड के खिलाफ इस लड़ाई में भारत और इजराइल साथ हैं. 





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