June 18, 2021

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Corona से ठीक हो चुके लोगों में बीमारी और मौत का ज्यादा खतरा? नई रिसर्च में दावा


नई दिल्ली: अगर आप कोरोना (Coronavirus) से ठीक भी हो चुके हैं तो भी अगले 6 महीने तक रूप से मौत का जोखिम ज्यादा रहता है. इनमें वह लोग भी शामिल हैं, जिनमें हल्के लक्षण थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी थी. यह कथित दावा नेचर मैगजीन में प्रकाशित हुई रिसर्च रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले सालों में दुनिया की आबादी पर इस बीमारी से बड़ा बोझ पड़ने वाला है. 

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी ने किया रिसर्च

अमेरिका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी (Washington University) में स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर ने कोरोना से जुड़ी विभिन्न बीमारियों की एक सूची बनाई. जिसमें इस महामारी के कारण लंबे समय में होने वाले परेशानियों की एक खतरनाक तस्वीर उभरती है. रिपोर्ट के मुताबिक शुरू में महज सांस के रोग से जुड़े एक विषाणु के तौर पर सामने आने के बावजूद यह वायरस लंबे वक्त तक शरीर के करीब हर अंग को प्रभावित कर सकता है. 

बीमारी के साथ जोखिम बढ़ता जाता है

रिसर्च से जुड़े असिस्टेंट प्रोफेसर जियाद अल-अली कहते हैं, ‘हमारे अध्ययन में यह सामने आया कि रोग का पता लगने के 6 महीने बाद भी कोरोना (Coronavirus) के मामूली मामलों में मौत का जोखिम कम नहीं होता है. बीमारी की गंभीरता के साथ ही यह जोखिम भी बढ़ता ही जाता है.’ अल-अली कहते हैं कि डॉक्टरों को उन मरीजों की जांच करते हुए ज्यादा अलर्ट रहना चाहिए, जो कोरोना से संक्रमित हो चुके हों. इन मरीजों को ठीक होने के बाद भी लगातार देखभाल और निगरानी की जरूरत होती है.’ 

लंबे वक्त तक दुष्प्रभाव बने रहते हैं

रिसर्चर के मुताबिक कोरोना (Coronavirus) से ठीक होने के बाद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक बने रहे हैं. इनमें सांस की समस्या, दिल की अनियमित धड़कन, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और बालों का गिरना शामिल हैं. रिसर्चर ने यह भी पाया कि शुरुआती संक्रमण से ठीक होने के बाद बीमारी के पहले 30 दिनों से अगले 6 महीने तक मौत का खतरा 60 प्रतिशत तक ज्यादा होता है. शोधकर्ताओं ने कहा कि इन 6 महीने में कोरोना से ठीक हुए प्रति 1000 मरीजों में 8 लोगों तक की मौत हो सकती है. 

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अस्पताल में भर्ती होने वालों को ज्यादा खतरा

उन्होंने कहा कि कोरोना (Coronavirus) के ऐसे मरीज, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी और वे एक महीने में ठीक हो गए. उन्हें भी 6 महीने तक यह खतरा बना रहता है. अल-अली ने दावा किया कि ऐसे मरीजों के मामले में 1000 में से 29 लोगों की मौत हो जाती है. रिसर्चरों के मुताबिक इस अध्ययन में करीब 87 हजार कोरोना मरीज और करीब 50 लाख अन्य मरीजों को शामिल किया गया, जो इससे उबर चुके थे.

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