June 14, 2021

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DRG जवान की हत्या कर जंगलों में फेंका शव, पर्ची में नक्सलियों ने लिखा- गद्दारी की यही सजा


पवन दुर्गम/ बीजापुरः 21 अप्रैल को बीजापुर में नक्सलियों ने DRG जवान SI मुरली ताती का अपहरण किया था. आज शनिवार सुबह जंगलों में जवान की लाश मिली है, हत्या करने वाले नक्सली संगठन पश्चिम बस्तर डिविजनल कमेटी ने बॉडी के साथ पर्चा जारी कर बताया कि उन्होंने जवान को किस वजह से मारा. बता दें कि कुछ दिनों पहले भी एक जवान राकेश्वर सिंह मनहास का अपहरण हुआ था, लेकिन उन्हें कुछ दिनों बाद ही छोड़ दिया गया था. 

पर्ची में लिखा, इस कारण की हत्या
बुधवार को जवान के अपहरण के बाद से ही उनकी पत्नी मैंनू ताती अपने तीन बच्चों के साथ पालनार गांव में डटी हुई थीं. उन्हें उम्मीद थी कि नक्सली उनके पति को जीवित रिहा कर देंगे, लेकिन नक्सलियों ने जवान को मारने के बाद रिहा किया. शव के साथ मिली नक्सलियों की पर्ची में लिखा था कि 2006 सलवा जुडूम से लेकर 2021 तक डीआरजी जवान के रूप में काम करते हुए उन्होंने गद्दारी की. हत्या की जा रही ताकी आगे से कोई भी डीआरजी जैसी गद्दारी नहीं करे. दरअसल, शहीद पहले खुद एक नक्सली था, बाद में सरेंडर करने के बाद वह सेना में शामिल हुआ, जिस कारण नक्सलियों ने जवान को गद्दार करार देते हुए मौत की सजा दे दी.  

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नक्सलियों ने गिनाए जवान के अपराध
नक्सलियों ने चिट्ठी में लिखा कि बीते 15 सालों में जवान मुरली ताती ने एड्समेटा, पालनार, मुधवेंडी गांव से हमला कर ग्रामीणों की हत्या, महिलाओं पर अत्याचार, छेड़छाड़ और फर्जी मुठभेड़ जैसे काम किए. जवान घर संपत्ति लूटपाट और लोगों को फर्जी केस में फंसाकर जेल में बंद करने जैसे काम भी किया करता था.

गंगालूर के पुलसुम पारा में फेंका शव
नक्सलियों ने संदेश देते हुए कहा कि जवान को इसीलिए सजा दी जा रही है ताकी आगे से कोई भी मुरली ताती जैसी गद्दारी नहीं करे. शनिवार सुबह गंगालूर के पुलसुम पारा के पास जवान का शव मिला, जहां सुरक्षा बलों की टीम ने शव बरामद किया. एएसपी पंकज शुक्ला ने जवान की पहचान की, शहीद की बॉडी परिजनों को दिखाने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई.

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प्रेस नोट जारी कर छोड़ा था पिछली बार
इससे पहले 3 अप्रैल को नक्सलियों ने टेकुलगुडम मुठभेड़ के दौरान बेहोश जवान राकेश्वर सिंह मनहास को अगवा किया था. अपहरण के दो दिन बाद प्रेस नोट जारी कर उन्होंने बताया था कि जवान सकुशल है और जल्द ही उसे रिहा किया जाएगा. जिसके 6 दिन बाद जवान को नक्सलियों ने छोड़ दिया था, लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया. नक्सलियों ने जन अदालत लगाते हुए फैसला किया कि एसआई मुरली ताती को मार दिया जाना चाहिए.

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