June 18, 2021

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DNA Analysis: कनाडा में कोरोना वैक्सीनेशन का चौथा चरण शुरू, भारत के बच्चों को कब मिलेगा ‘सुरक्षा कवच’


नई दिल्ली: आज देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण में कमी आई है. देश में 10 मई को कोरोना से 3 लाख 29 हज़ार 942 नए मरीज़ संक्रमित हुए. यानी कई दिनों के बाद नए मरीजों की संख्या में काफी कमी आई.

मई के महीने में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक दिन में नए मामलों की संख्या इतनी कम रही है. इसीलिए इन आंकड़ों को शुभ माना जा रहा है. लेकिन क्या ये आंकड़े वाकई में शुभ हैं. क्या दूसरी लहर का पीक चल गया है. 

संक्रमितों की संख्या में कमी अच्छे संकेत?

सबसे पहले आपको ये बताते हैं कि इन आंकड़ों को देश के लिए अच्छा संकेत क्यों कहा जा सकता है? जब भी कोरोना वायरस के मामले कम होते हैं तो पहली आशंका यही जताई जाती है कि कहीं कोरोना (Coronavirus) के टेस्ट तो कम नहीं हुए. यानी कम टेस्ट की वजह से तो नए मामलों में कमी नहीं आई. अगर इस सवाल को 10 मई के आंकड़ों तक सीमित रखें तो पता चलता है कि इस दिन लगभग उतने ही टेस्ट किए गए, जितने कि हर दिन हो रहे हैं. इसे आप इन आंकड़ों से समझिए.

देश में 6 मई को जब पहली बार एक दिन में 4 लाख 14 हज़ार नए मरीज़ कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हुए थे. तब पूरे देश में कोरोना के कुल 18 लाख 26 हज़ार टेस्ट हुए थे. अब इसी आधार पर 10 मई को आंकड़ों को समझिए. 10 मई को नए मामलों की संख्या 3 लाख 29 हज़ार रही जबकि टेस्ट 6 मई से भी ज़्यादा हुए. लगभग 18 लाख 50 हज़ार टेस्ट इस दिन हुए.

देश में घटने लगे कोरोना के मामले

इस लिहाज से देखें तो बहुत दिनों के बाद देश में टेस्ट कम नहीं हुए बल्कि नए मरीज़ों की संख्या में कमी आई है. इसलिए इसे आप शुभ समाचार कह सकते हैं. हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात ये है कि नए मामलों में आई इस गिरावट को देश के लिए अच्छा संकेत तभी माना जा सकता है, जब ये ट्रेंड एक दिन नहीं बल्कि लगातार कई दिनों तक बना रहे. यानी रोज़ टेस्ट ज़्यादा हों और नए मरीज़ कम मिलें.

क्या अभी तक ऐसा देखने को मिला है? अब ये समझिए कि देश में इस समय प्रति दिन औसतन 18 लाख से ज़्यादा कोरोना (Coronavirus) के टेस्ट हो रहे हैं. लेकिन 9 मई को यानी दो दिन पहले जब देश में नए मरीज़ों की संख्या में बड़ी गिरावट आई और आंकड़ा चार लाख से सीधे 3 लाख 66 हज़ार पहुंच गया, तब देश में काफ़ी कम टेस्ट हुए थे. 9 मई को 14 लाख 74 हज़ार टेस्ट ही हुए थे. 

इसी तरह 3 मई को जब नए मामलों की संख्या 3 लाख 57 हज़ार थी, तब भी उस दिन 16 लाख टेस्ट हुए थे. पहले मामले कम इसलिए आ रहे थे क्योंकि टेस्ट कम हो रहे थे लेकिन दूसरी लहर में पहली बार ऐसा नहीं हुआ है. हमारा ये भी मानना है कि जब तक नए मामलों में गिरावट का ये ट्रेंड इसी तरह नहीं बना रहता, तब तक ये कहना जल्दबाज़ी होगी कि दूसरी लहर का पीक आ गया है.

कई राज्यों ने टेस्टिंग की स्पीड कम की

ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि भले देश में कोरोना (Coronavirus) की टेस्टिंग स्पीड 18 लाख के आसपास है लेकिन बड़ी बात ये है कई राज्यों ने अपने यहां कोरोना की जांच कम कर दी हैं. इनमें वो राज्य सबसे ऊपर हैं, जहां संक्रमण काफ़ी बुरी तरह फैला हुआ है.

केरल, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात में इस समय प्रतिदिन हर 10 लाख लोगों पर उतने टेस्ट नहीं हो रहे, जितने अप्रैल के महीने में हो रहे थे. यहां आपके मन में ये सवाल हो सकता है कि जब इन राज्यों में कम टेस्ट हो रहे हैं तो देश की टेस्टिंग स्पीड पर इसका असर क्यों नहीं दिख रहा है. तो इसका कारण हैं वो राज्य, जहां अब ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं

इनमें पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश प्रमुख हैं. यानी कुछ राज्यों में टेस्ट कम हुए तो कुछ में बढ़ गए. अब विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संक्रमण को नियंत्रण में लाना है तो टेस्टिंड को कम करने की जगह बढ़ाना होगा. खास तौर पर उन राज्यों को जहां टेस्ट अभी कम हो रहे हैं.

हम आपसे यही कहेंगे कि ज़्यादा ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है. आप कल के आंकड़ों को अच्छी शुरुआत मान सकते हैं. लेकिन आपको ये याद रखना है कि अगर ये ट्रेंड आने वाले दिनों तक ऐसा नहीं रहता तो हमें कोई फायदा नहीं होगा.

कनाडा में बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू 

अब आपको भारत से साढ़े 11 हज़ार किलोमीटर दूर कनाडा लेकर चलते हैं. कनाडा में 12 से 18 साल तक के बच्चों को वैक्सीन लगनी शुरू हो गई है. इसके अलावा जिन बच्चों की उम्र अभी 11 साल है और वो इस साल 12 वर्ष के हो जाएंगे, ऐसे बच्चों को भी वहां वैक्सीन लगाई जा रही है. कनाडा फाइज़र की वैक्सीन इस्तेमाल कर रहा है, जो बच्चों को कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाती है.

कनाडा के अलावा अमेरिका ने भी आज 12 से 15 साल के बच्चों पर फाइज़र की इसी वैक्सीन के Emergency Use की मंज़ूरी दे दी है. इसलिए ये एक बड़ी ख़बर है. कनाडा में बच्चों का वैक्सीनेशन Corona Vaccination शुरू हो गया है और अमेरिका से भी जल्द ऐसी तस्वीरें आपको देखने को मिलेंगी. अब बड़ा सवाल यही है कि भारत में बच्चों के लिए वैक्सीन कब तक उपलब्ध होगी?

देखें वीडियो- DNA: भारत में बच्चों को वैक्सीन कब लगेगी?

हमारे देश में कुल आबादी का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा 18 साल से कम उम्र के बच्चों का है. जबकि 11 से 17 साल की उम्र के बच्चों की आबादी साढ़े 17 करोड़ है. डॉक्टरों का अनुमान है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) की तीसरी लहर में सबसे ज़्यादा ख़तरा इसी उम्र के बच्चों पर होगा. यानी साढ़े 17 करोड़ बच्चे संक्रमण के निशाने पर होंगे. इसलिए इन्हें वैक्सीन लगानी ज़रूरी है.

अगर भारत की बात करें तो अभी Serum Institute of India का वादा है कि वो अक्टूबर तक बच्चों के लिए वैक्सीन बना लेगा. Bharat Biotech कंपनी भी 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन बना रही है, जिसे मई-जून तक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है. बच्चों की ये वैक्सीन भी ट्रायल स्टेज में है.

इसके अलावा फाइज़र ने वैक्सीन बना ली है, लेकिन ये वैक्सीन भारत को भी मिल जाएगी, इसकी उम्मीद ना के बराबर है. इसकी वजह ये है कि हमारे देश में फाइज़र की वही वैक्सीन अब तक लोगों को लगनी शुरू नहीं हुई है, जो 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए है. इसके अलावा कुछ और कम्पनियां बच्चों के लिए वैक्सीन बना रही हैं लेकिन ये सभी Vaccines ट्रायल के शुरुआती चरण में हैं.

तीसरी लहर में बच्चों पर अटैक का डर

अब चिंता वाली बात ये है कि WHO का ऐसा अनुमान है कि पहली लहर में पूरी दुनिया में सिर्फ़ 8 प्रतिशत बच्चे ही कोरोना (Coronavirus) से प्रभावित हुए थे और वो अस्पताल गए बिना ही ठीक हो गए. दूसरी लहर में कुछ बच्चों को अस्पताल जाने की ज़रूरत पड़ी और तीसरी लहर में वायरस का नया वैरिएंट बच्चों पर ही अटैक करेगा. इसलिए बच्चों को वैक्सीन लगाना बहुत ज़रूरी है. लेकिन एक सच ये भी है कि हमारे पास वैक्सीन है ही नहीं. जबकि नए आंकड़े डराने वाले हैं.

देश में 1 मार्च से चार अप्रैल के बीच लगभग एक महीने में महाराष्ट्र में 60 हज़ार बच्चे संक्रमित हुए, कर्नाटक में लगभग साढ़े 7 हज़ार बच्चे कोरोना पॉज़िटिव हुए, छत्तीसगढ़ में लगभग 6 हज़ार बच्चे संक्रमित हुए, उत्तर प्रदेश में 3 हज़ार बच्चों को कोरोना को हुआ और लगभग इतने ही बच्चे दिल्ली में भी इस वायरस से संक्रमित हुए.

हमारे देश में लोग बच्चों को लेकर काफ़ी संवेदनशील होते हैं. बच्चों की ज़रा सी तबीयत ख़राब होने पर माता पिता पूरा घर सिर पर उठा लेते हैं और परेशान हो जाते हैं. ऐसे में सोचिए जब ये वायरस बच्चों को संक्रमित करेगा तो हमारे देश में क्या स्थिति होगी. इसलिए इस पर तेज़ी से काम करने की ज़रूरत है.

अब आपको 5 बातें बताते हैं, जिनकी मदद से आप अपने बच्चों को संक्रमण से बचा सकते हैं:-

– बच्चों को बाहर ना भेजें. बच्चों को घर में ही रखें. घर की दहलीज़ को बच्चों के लिए लक्ष्मण रेखा बना दें.
– बच्चों की Immunity का ध्यान रखें.
– अपने बच्चों को दूसरे बच्चों के साथ ना खेलने दें.
– अगर आपके घर में ज़्यादा कमरे हैं तो बच्चों को एक अलग कमर में रखें.
– कोरोना वायरस को हल्के में बिल्कुल ना लें. 

ये बात याद रखें कि अब वायरस पहले जैसा नहीं रहा है. अब ये बच्चों को प्रभावित कर रहा है.

देश में कोरोना वैक्सीन की कमी 

इस समय पूरा देश वैक्सीन की कमी के ज़बरदस्त संकट से जूझ रहा है. मौजूदा स्थिति ये है कि जहां पहले प्रति दिन 34 लाख लोगों को वैक्सीन लग रही थी. अब ये संख्या 9 लाख तक सिमट कर रह गई है.

अप्रैल के महीने में औसतन एक हफ़्ते में लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को वैक्सीन लग रही थी लेकिन अब इसमें गिरावट आई है. 1 से 7 मई के बीच देश में लगभग 65 लाख लोगों को ही वैक्सीन लग पाई. बड़ी बात ये है कि अगर वैक्सीनेशन Corona Vaccination की गति इसी तरह रही तो आधी आबादी को ही टीके लगाने में ढाई साल लग जाएंगे. जबकि देश के सभी लोगों तक वैक्सीन (Corona Vaccine) पहुंचने में 5 साल का समय लग सकता है. ये समय बहुत ज़्यादा है.

भारत में 5 साल में एक सरकार का कार्यकाल पूरा हो जाता है. पांच साल में समुद्र का जलस्तर 1550 Centimeter बढ़ जाता है. 5 साल में लगभग साढ़े 7 करोड़ लोग पूरी दुनिया में Heart Attack की वजह से जान गंवा देते हैं और 5 साल में पूरी दुनिया में 1700 से साढ़े 3 हज़ार करोड़ पेड़ काट दिए जाते हैं. इसके अलावा 5 साल में और भी बहुत कुछ हो जाता है. पांच साल का समय बहुत ज़्यादा होता है.

सभी को वैक्सीन लगाने में 5 साल लगेंगे

इसलिए भारत वैक्सीन के लिए पांच साल का इंतज़ार नहीं कर सकता. और यही वजह है कि हम लगातार वैक्सीन से पेटेंट हटाने की मांग कर रहे हैं. आज इस कड़ी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हमारी इस मांग को देश के सामने रखा. उन्होंने कहा कि अभी भारत में दो कंपनियां ही वैक्सीन (Corona Vaccine) का उत्पादन कर रही हैं.

पहली है पुणे की Serum Institute of India कम्पनी, जो Covishield बना रही है और दूसरी है हैदराबाद की Bharat Biotech कम्पनी, जो Co-Vaxin बना रही है. ऐसे में अगर इन दोनों कंपनियों से वैक्सीन का Formula लेकर दूसरी Pharma कम्पनियों को दिया जाता है तो देश में वैक्सीन का संकट ख़त्म हो सकता है. 

वैसे तो वैक्सीन को लेकर दिल्ली सरकार और बीजेपी के बीच काफ़ी खींचतान है और इस मुद्दे पर काफ़ी राजनीति भी हो रही है. लेकिन अरविंद केजरीवाल ने वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए जो Formula बताया है, आज आपको उसे सुनना चाहिए. हम भी लगातार यही मांग कर रहे हैं और हमारे देश के नेताओं ने भी इस विषय पर अपनी राय देनी शुरू कर दी है.

सीएम केजरीवाल ने केंद्र पर उठाया सवाल

अरविंद केजरीवाल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों आज ये पूछ रहे हैं कि केन्द्र सरकार इस तरह का कोई क़दम क्यों नहीं उठाती? क्यों वैक्सीन बनाने का फॉर्मूला इन दोनों कम्पनियों तक ही सीमित है? इसके अलावा कुछ लोग ये झूठ भी फैला रहे हैं कि केन्द्र सरकार वैक्सीन (Corona Vaccine) कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कोई निर्णय नहीं ले रही. लेकिन क्या ये आरोप सही है? अब आप इसे समझिए.

ये सच है कि केन्द्र सरकार The Patents Act 1970 के तहत थर्ड पार्टी कम्पनियों को वैक्सीन का उत्पादन करने के लिए Compulsory License जारी कर सकती है. मुश्किल ये है कि इस मामले में सरकार का ये फ़ैसला सिर्फ़ एक ही कम्पनी पर लागू होगा और वो कम्पनी है Bharat Biotech, जो Co-vaxin बना रही है. Serum Institute of India की Covishield वैक्सीन पर ये फ़ैसला प्रभावी नहीं होगा, क्योंकि इस वैक्सीन का Patent ब्रिटेन की Oxford University के पास है.

यही वजह है कि भारत और दक्षिण अफ्रीका ने World Trade Organisation में पिछले साल अक्टूबर में सभी Vaccines को पेटेंट मुक्त करने के लिए प्रस्ताव दिया था, जिसे हाल ही में अमेरिका ने भी समर्थन दिया है. हालांकि ये प्रक्रिया काफ़ी लम्बी है और हमारा देश संघर्ष कर रहा है. इसलिए ये कहना पूरी तरह ग़लत है कि केन्द्र सरकार ऐसा नहीं करना चाहती .

असल में यहां सवाल सरकारों का नहीं बल्कि Vaccine बनाने वाली कंपनियों का है, जो वैक्सीन का फॉर्मूला दूसरी कंपनियों को नहीं देना चाहती. क्योंकि इससे उनकी कमाई बन्द हो जाएगी. आज हम दुनिया की इन सभी बड़ी-बड़ी कंपनियों से यही कहना चाहते हैं कि ये काम आने का समय है, कमाने का नहीं. इसलिए वैक्सीन (Corona Vaccine) को पेटेंट मुक्त करना ही चाहिए. वर्ना वही होगा, जो आज महाराष्ट्र में हुआ.

महाराष्ट्र में वैक्सीनेशन पर लगाई गई रोक

आज महाराष्ट्र सरकार ने 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों के वैक्सीनेशन Corona Vaccination पर रोक लगा दी. सरकार का कहना है कि राज्य के पास वैक्सीन की दो लाख 75 हज़ार डोज़ ही बची हैं, इसलिए ये निर्णय लिया गया है. वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही फिर से 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी. सोचिए वैक्सीन की कमी की वजह से एक राज्य में टीकाकरण रोकना पड़ा है. ये बिल्कुल अच्छी ख़बर नहीं है.

अगर वैक्सीनेशन के मामले में भारत की तुलना दूसरे देशों से करें तो इज़रायल में लगभग 59 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं. अमेरिका में 34 प्रतिशत, ब्रिटेन में 26 प्रतिशत और इटली में 12 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन (Corona Vaccine) को दोनों डोज़ लग गई हैं. जबकि भारत में अब तक सिर्फ़ कुल आबादी के ढाई प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन की दोनों डोज़ लग पाई हैं. कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ भारत दूसरे देशों से काफ़ी पिछड़ गया है.

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वैक्सीनेशन ज़रूरी क्यों है, आप इसे ब्रिटेन के एक उदाहरण से समझ सकते हैं. England और Scotland में एक साल बाद पहली बार ऐसा हुआ, जब कोरोना वायरस से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वहां की 52 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लग चुकी है और 26 प्रतिशत आबादी को दोनों डोज़ लग चुकी हैं. जबकि हमारे देश ने तो अभी एक डोज़ के मामले में 10 प्रतिशत का भी आंकड़ा पार नहीं किया है. इसलिए ज़रूरी है कि वैक्सीन को पेटेंट मुक्त किया जाए और दूसरी कम्पनियां भी वैक्सीन का निर्माण कर सकें. हमारे देश में तीन हज़ार Pharma कंपनियां हैं. सोचिए इनमें से 200 कम्पनियां भी वैक्सीन (Corona Vaccine) बनाने लगें तो क्या वैक्सीन की कमी देश में होगी.

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