नवरात्रि पूजन के बाद आप माता की साख या ज्वारे का क्या करने वाले हैं, हम बताते हैं इसके सेहत लाभ


नवरात्रि पूजन का अहम हिस्सा हैं माता की साख या ज्वारे। इसके बिना माता की आराधना अधूरी मानी जाती हैं। लेकिन 9 दिनों बाद आप इसका क्या करते हैं? हम बता रहें हैं इस साख के स्वास्थ्य लाभ।

ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी की रचना के बाद जो सबसे पहली फसल उगाई गई वह ‘जौ’ (Barley) थी। हालांकि इसे आने वाली खेती की तैयारी से जोड़कर भी देखा जाता है। पर नवरात्रि (Navratri) में माता की साख (Sakh aka jware) या खेतड़ी बोने की प्रथा कई राज्यों में प्रचलित है। अमूमन नौ दिनों के नवरात्रि पूजन (Navratri Pujan) के बाद इस साख को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है।

पर ऐसे समय में जब नदी-तालाब ढूंढे नहीं मिलते और आप कोविड-19 (Covid-19) के कारण कहीं दूर भीड़ भरे माहौल में भी नहीं जाना चाहते, तब आप इसका क्या करते हैं? कैसा रहे, अगर आपको पता चले कि इसका सेवन आपकी सेहत के लिए लाभदायक है! आइए जानते हैं जौ या ज्वारे (Barley seeds grass benefits) खाने का तरीका और इसके सेहत लाभ। 

अगर आप भी यह सोचकर परेशान हैं कि नवरात्रि पूजन के बाद इस साख का क्या किया जाए, तो हमारे पास इसका सेहतमंद समाधान है। असल में यह माता का प्रसाद है। यही प्रसाद आपकी सेहत के लिए भी वरदान बन सकता है। जानना चाहते हैं कैसे, तो इस लिंक पर क्लिक कीजिए और जानिए माता की साख या जौ के ज्वारे के सेहत लाभ – 

नवरात्रि पूजन के बाद आप माता की साख या ज्वारे का क्या करने वाले हैं, हम बताते हैं इसके सेहत लाभ

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