बैंक एफडी पर मिल रहा नेगेटिव रिटर्न, बढ़ने के बजाय घटने लगी सेविंग्स


नई दिल्ली: बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से आय पर निर्भर वरिष्ठ नागरिकों और अन्य निवेशकों को मिल रहा ब्याज वास्तविक महंगाई से कम है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी लेटेस्ट मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में चालू वित्त वर्ष के लिए रिटेल इन्फ्लेशन के 5.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है.

इन्फ्लेशन 5.3% पर रहने का अनुमान

RBI ने पिछले हफ्ते कहा कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित इन्फ्लेशन के 2021-22 के दौरान 5.3 प्रतिशत के स्तर पर रहने का अनुमान है. इस स्तर पर देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पास एक वर्ष के लिए एफडी कराने पर नेगेटिव ब्याज मिलेगा और बचतकर्ता के लिए वास्तविक ब्याज दर नेगेटिव 0.3 प्रतिशत होगी. वास्तविक ब्याज दर बैंक द्वारा दी जा रही ब्याज दर में इन्फ्लेशन की दर को घटाकर जानी जा सकती है. अगस्त में खुदरा महंगाई दर 5.3 फीसदी रही.

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FD पर 4.9% ब्याज देता है एचडीएफसी

इसी तरह 2-3 साल की अवधि के लिए मिलने वाली ब्याज दर, चालू वित्त वर्ष के लिए प्रोजेक्टिड इन्फ्लेशन से कम है. प्राइवेट क्षेत्र का लिडिंग एचडीएफसी बैंक 1-2 साल की एफडी के लिए 4.90 प्रतिशत ब्याज दर की पेशकश करता है, जबकि 2-3 साल के लिए यह 5.15 प्रतिशत है. हालांकि, सरकार द्वारा चलाई जाने वाली छोटी बचत योजनाएं, बैंकों की एफडी दरों की तुलना में बेहतर रिटर्न दे रही हैं. छोटी बचत योजनाओं के तहत 1-3 साल की सावधि जमाओं के लिए ब्याज दर 5.5 प्रतिशत है, जो इन्फ्लेशन लक्ष्य से अधिक है.

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बैंक जमा दरों में हो सकती है बढ़ोतरी

ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के पार्टनर विवेक अय्यर ने कहा कि वास्तविक दरें कुछ समय के लिए नेगेटिव रहने वाली हैं, और यह जरूरी है कि लोग वित्तीय साक्षरता के आधार पर सही निवेश विकल्प को चुनें. रिसर्जेंट इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ज्योति प्रकाश गाडिया ने कहा कि अधिक जोखिम वाले विकल्पों ने अभूतपूर्व बढ़ोतरी दिखाई है, जिसके इन्फ्लेशन पर काबू पाने या बैंक जमा दरों में बढ़ोतरी होने तक जारी रहने की उम्मीद है.

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