पूर्वांचल एक्‍सप्रेसवे: सामरिक महत्व वाली असाधारण सड़क के 3 बड़े रोल क्या हैं?


लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल Express Way पर मंगलवार को भारतीय वायुसेना के विशाल जहाज़ C-130J Hercules ने लैंडिग की. इसी विमान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भी मौजूद थे. भारत के लोगों ने इतने बड़े जहाज़ को सड़क पर उतरते हुए इससे पहले कभी नहीं देखा होगा, वो भी तब जब उसमें प्रधानमंत्री बैठे हों. 

प्रधानमंत्री मोदी के C-130J Hercules विमान ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) पर लैंडिंग की. इस लैंडिंग के बाद उनका काफिला समारोह स्थल पर पहुंचा, जहां लगभग 341 किलोमीटर लंबे इस Expressway का उद्घाटन किया गया.

भारत ने कराया ताकत का अहसास

इस उद्घाटन के बाद Jaguar, मिराज 2000 और सुखोई जैसे Fighter Jets ने आसमान में Fly Past किया और पूर्वांचल एक्सप्रेवे पर Touch Down करके इसकी ताक़त का अहसास भी दुनिया को कराया. 341 किलोमीटर लंबे इस पूर्वांचल एक्सप्रेसवे में कुल सात बड़े पुल, 114 छोटे पुल हैं और 271 अंडरपास हैं. ये एक्सप्रेसवे लखनऊ से गाज़ीपुर को जोड़ता है. 

इस एक्सप्रेसवे के कुल तीन बड़े रोल हैं. पहला रोल है, पूर्वांचल की पश्चिमी यूपी के साथ बेहतर Connectivity. लगभग 303 किलोमीटर लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे ने पश्चिमी यूपी को पहले ही लखनऊ से जोड़ दिया था. अब इस एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) का विस्तार गाजीपुर तक हो गया है. अगर इसमें 165 किलोमीटर लंबे Yamuna Expressway को भी जोड़ दें, जो नोएडा को आगरा से जोड़ता है तो ये समझ लीजिए कि अब नोएडा से गाजीपुर के लिए सीधी Connectivity हो गई है. सफर के साथ ये एक्सप्रेसवे पूर्वांचल में व्यापार की भी नई सम्भावनाओं को खोलेगा.

युद्ध में भारतीय वायुसेना को मिलेगी बढ़त

इस एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) का दूसरा रोल है, युद्ध की स्थिति में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों को लैंडिंग के लिए एक वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराना. यानी यह एक्सप्रेसवे भी है और एक हवाई पट्टी भी. इस एक्सप्रेसवे से Line of Actual Control की दूरी सिर्फ 600 किलोमीटर है. ऐसे में अगर सीमा पर हथियारों और सैनिकों की ज़रूरत पड़ती है तो सेना के विमान इस एक्सप्रेसवे से उड़ान भर पाएंगे. 

अक्सर युद्ध की स्थिति में कोई भी देश सबसे पहले दुश्मन देश के हवाई अड्डों को निशाना बनाता है. जैसे 1971 के युद्ध में हुआ था. उस समय पाकिस्तान की वायु सेना ने भारत के हवाई अड्डों पर बमबारी शुरू कर दी थी, ताकि भारतीय सेना युद्ध होने पर अपने लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल नहीं कर पाए. अब अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है और भारतीय वायु सेना के पास लैंडिंग और Take Off के लिए कोई हवाई अड्डा नहीं बचता तो ये एक्सप्रेसवे एक मजबूत विकल्प के तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएगा. भारत सरकार ऐसे 29 एक्सप्रेसवे और Highways बना रही है, जो युद्ध की स्थिति में हवाई पट्टी का भी काम करेंगे.

पूर्वांचल के 9 जिलों को जोड़ता है एक्सप्रेसवे

इस एक्सप्रेसवे का तीसरा रोल राजनीति से जुड़ा है. ये एक्सप्रेसवे पूर्वांचल (Purvanchal Expressway) के 9 ज़िलों को जोड़ता है, जहां विधान सभा की कुल 55 सीटें हैं. इन 9 जिलों में अमेठी का ज़िला भी आता है, जिसे गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है. हालांकि पिछली बार राहुल गांधी यहां से लोक सभा का चुनाव हार गए थे. इसके अलावा इनमें आजमगढ़ और अम्बेडकरनगर जैसे ज़िले भी हैं, जहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का प्रभाव माना जाता है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधान सभा चुनाव होने हैं, ऐसे में ये एक्सप्रेसवे इन सीटों को भी प्रभावित करेगा.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को पूर्वांचल के गाज़ीपुर से जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे को सिर्फ 39 महीने में बनाकर तैयार किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिमोट का बटन दबाकर 341 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश और देश की जनता को समर्पित किया.

पूर्वांचल एक्सप्रेसदेश की सैन्य ताकत को भी नई रफ्तार देगा. इस एक्सप्रेसवे पर करीब 3 किलोमीटर का एक एयर स्ट्रिप भी तैयार किया गया है. जिस पर वायुसेना के लड़ाकू विमान और लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी उतर सकते हैं. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर ये एयर स्ट्रिप सुल्तानपुर जिले में बनाया गया है. 

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के मौके पर एयरफोर्स ने शानदार एयर शो का भी आयोजन किया. एक-एक कर वायुसेना के लड़ाकू विमान आसमान से कलाबाज़िया दिखा रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयर शो देखा. आसमान में गर्जना के साथ वायुसेना के विमान अद्म्य क्षमता और शौर्य का प्रदर्शन करने के साथ-साथ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की क्षमता को भी परख रहे थे.

पश्चिम को पूर्वी यूपी से करेगा कनेक्ट

लखनऊ से गाजीपुर तक तैयार ये एक्सप्रेसवे वैसे तो 9 ज़िलों को जोड़ेगा. लेकिन हकीकत तो ये है कि इसका फायदा पश्चिमी यूपी से पूर्वी यूपी तक की जनता को होगा. 341 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे से यूपी के 9 ज़िले जुड़ रहे हैं. ये एक्सप्रेसवे लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, आज़मगढ़, मऊ और ग़ाज़ीपुर ज़िले से होकर गुजरेगा. 

सिर्फ लखनऊ और गाज़ीपुर के लोगों को ही पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का फायदा नहीं होगा. जो लोग गाज़ीपुर से दिल्ली या नोएडा सड़क के रास्ते आना चाहते हैं. उन्हें भी फायदा होगा. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) बनने से पहले ग्रेटर नोएडा से गाज़ीपुर आने में 13 से 14 घंटे लगते थे. अब ये समय घटकर सिर्फ 9 से 10 घंटे हो जाएंगे. अगर आप ग्रेटर नोएडा से गाजीपुर जाना चाहते हैं तो आपको पहले यमुना एक्सप्रेसवे से आगरा आना होगा, जिसमें 3 घंटे लगेंगे. इसके बाद 3 घंटे में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से लखनऊ पहुंचेंगे और फिर लखनऊ से गाज़ीपुर के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आएंगे. इस तरह ग्रेटर नोएडा से गाज़ीपुर 10 घंटे में आ सकेंगे .

दिल्ली से अयोध्या जाना होगा आसान

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक शहर अयोध्या की दूरी भी कम कर देगा. पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के ज़िलों से अयोध्या आना और भी आसान हो जाएगा. दरअसल पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर जब आप 80km तक आएंगे तो अयोध्या का भी एक कट दिया गया है. यहां से अयोध्या मात्र 50km की दूरी पर है. यानि अब इस पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से अयोध्या पहुंचना आसान हो जाएगा, ख़ास तौर पर जो लोग पश्चिमी यूपी और दिल्ली से आ रहे हैं. यह अयोध्या-जगदीशपुरी नेशनल हाईवे में मिल जाएगा. यहां से मात्र एक घंटे में अयोध्या. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है. इसलिए सरकार अब कनेक्टिविटी पर ज़्यादा फ़ोकस कर रही है. 

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) का फायदा सिर्फ उत्तर प्रदेश के लोगों को होगा, ऐसा नहीं है. गाज़ीपुर में जहां एक्सप्रेसवे खत्म हो रहा है, वहां से बिहार बॉर्डर की दूरी सिर्फ 18 किलोमीटर है. यानी बिहार के लोगों को भी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से फायदा होगा. पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को गाजीपुर से बिहार को जोड़ने के प्रस्ताव पर भी काम चल रहा है.

100 सालों के हिसाब से तैयार हुआ एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल का यह एक्सप्रेस वे (Purvanchal Expressway) 100 साल के हिसाब से तैयार किया गया है. इसके डिज़ाइन में ख़ास बातों का ध्यान रखा गया है. सुरक्षा और समय की बचत का विशेष ख़्याल रखा गया है. इस एक्सप्रेस वे पर 18 फ्लाईओवर, 7 रेलवे ओवर ब्रिज, 7 बड़े पुल, 118 छोटे पुल, 13 इंटरचेंज, 8 टोल प्लाज़ा, 271 अंडरपास, 503 पुलिया बनाई गई हैं. 13 कट कुल दिए गए हैं जहां से आप इस एक्सप्रेस वे पर चढ़ सकते हैं और उतर सकते हैं.

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भारत ऐसे शानदार Highways और ExpressWays तो बना रहा है, जिन पर गाड़ियां भी दौड़ सकती है और वायुसेना के विमान भी उतर सकते हैं. आप जानते हैं कि हमारे देश की इन शानदार सड़कों को अक्सर आंदोलनकारियों की नजर लग जाती है. जो आंदोलनकारी आज दिल्ली के पास गाज़ीपुर बॉर्डर पर बैठे हैं उनका बस चला तो एक दिन वो पूर्वांचल के गाज़ीपुर भी पहुंच जाएंगे और वहां भी धरना देने लगेंगे. तब वहां विमानों की लैंडिंग तो दूर गाड़ियां भी नहीं दौड़ पाएंगी. इसलिए जिन सड़कों के लिए भारत का हर व्यक्ति GST के रूप में अपनी जेब से Tax चुकाता है, उन्हें हर तरह की रुकावट से आज़ाद कराने का समय आ गया है.

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