कोर्ट रूम में क्राइम: दो पुलिसवालों ने की जज से मारपीट, पिस्टल तानी, गालियां दीं; मुश्किल से बची जान


पटना: बिहार (Bihar) में दो पुलिसकर्मियों ने कोर्ट में ही जज के साथ मारपीट की. इतना ही नहीं आरोपियों ने न्यायाधीश पर पिस्टल तानकर उन्हें गंदी-गंदी गालियां भी दीं. दोनों पुलिसवालों को जेल भेज दिया गया है. यह घटना मधुबनी जिले के झंझारपुर व्यवहार न्यायालय की है. दरअसल, घोघरडीहा थाने में तैनात थानाध्यक्ष (SHO) गोपाल प्रसाद और दारोगा (SI) अभिमन्यु कुमार एक शिकायत पर चल रही सुनवाई को लेकर गुरुवार को जज अविनाश कुमार (Judge Avinash Kumar) के सामने पेश हुए थे. इसी दौरान उन्होंने न्यायाधीश से मारपीट की.

वकीलों ने किसी तरह बचाई जान

‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, किसी मामले की सुनवाई के दौरान बहस हुई और दोनों पुलिसकर्मियों ने अचानक जज (Judge) पर हमला कर दिया. फिलहाल घटना की वजह अभी तक सामने नहीं आई है. शोर-शराबा सुनकर वकील जज के चैंबर की ओर दौड़े और जज को आरोपियों के चंगुल से बचाया. बाद में वकीलों ने दोनों पुलिसवालों को कोर्ट परिसर में बंधक बना लिया. इस घटना में कई वकीलों के भी घायल होने की खबर है.

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सुर्खियों में रहे हैं Judge कुमार 

जज अविनाश कुमार अपने फैसले और टिप्पणियों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. इसी साल सितंबर में उन्होंने छेड़छाड़ के आरोपी को अपने गांव की सभी महिलाओं के कपड़े धोने और प्रेस करने की शर्त पर बेल दी थी. यह सेवा आरोपी को लगातार 6 महीने तक मुफ्त में देनी है. न्यायाधीश ने गांव के पंच-सरपंच को इसकी मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा था. 6 महीने पूरे होने पर दोषी को मुफ्त सेवा का प्रमाण पत्र लेकर कोर्ट में जमा करने का भी आदेश दिया गया था.

इस वजह से नाराज है पुलिस खेमा?

ऐसा माना जा रहा है कि पुलिस खेमा जज द्वारा अपने मुखिया पर टिप्पणी को लेकर नाराज है. हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान जज अविनाश कुमार ने मधुबनी के एसपी डॉ सत्यप्रकाश को कानून की जानकारी न होने पर ट्रेनिंग के लिए भेजने की बात की थी. दरअसल, जज कुमार की कोर्ट ने भैरव स्थान थाने में दर्ज एक FIR में पॉक्सो एवं बाल विवाह अधिनियम 2006 नहीं लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार को 14 जुलाई 2021 को एक साथ पत्र जारी किया था. इसमें मधुबनी SP, झंझारपुर DSP और भैरव स्थान थाना के अलावा व्यवहार न्यायालय के एक अधिकारी की भूमिका सवाल खड़े किए थे. उनको कानून की जानकारी नहीं होने की बात कही थी.

 



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