26 जनवरी को हिंसा करने वालों पर दर्ज मुकदमे वापस ले केंद्र सरकार : संयुक्त किसान मोर्चा


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री द्वारा तीनो कृषि कानूनों को रद्द करने के ऐलान के बाद आज संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक सिंघु बॉर्डर पर हुई. बैठक में फैसला लिया गया कि किसान प्रदर्शनकारी अभी बॉर्डर नहीं खाली करेंगे और बची हुई मांगों के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे. बची हुई मांगो में कानून MSP, प्रदर्शनकारियों पर मुकदमों को वापस लेना शामिल है.

ZEE NEWS के साथ खास बातचीत में किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की मांग सभी प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे वापस करने की है. जो मुकदमे 26 जनवरी की हिंसा में लिखे गए थे उन पर से भी मुकदमा वापस लेने की मांग संयुक्त किसान मोर्चा भारत सरकार से करेगा. 

कुल मिलाकर किसान संगठनों कुछ और मांगें हैं. और उनके मुताबिक जब तक ये मांगे नहीं पूरी होंगी तब तक किसान बॉर्डर नहीं खाली करेंगे. ये मांगें कानूनन MSP की गारंटी, बिजली ACT, पराली एक्ट को रद्द करना, प्रदर्शनकारियों पर लिखे गए मुकदमों को वापस लेना, मुआवजा, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की गिरफ्तारी और पद से हटाना शामिल है.

संयुक्त किसान मोर्चा की आज की बैठक में निर्णय लिया गया कि 22 नवंबर से लेकर 26 नवंबर तक होने वाले कार्यक्रम पहले जैसे चलते रहेंगे. 27 नवंबर को किसान संगठन अगली बैठक करके 29 नवंबर की संसद तक ट्रैक्टर मार्च पर अंतिम फैसला लेगा.

आज की बैठक में सारा पेंच 29 नवंबर को होने वाली संसद तक ट्रैक्टर मार्च पर फंसा था. जहां गुरनाम सिंह चढूनी जैसे किसान नेता संसद तक ट्रैक्टर मार्च निकालने के लिये अड़े थे तो दूसरी तरफ अन्य किसान नेता इस मार्च को बेफिजूल बता रहे थे. ऐसे में संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसला किया कि 24 नवंबर को कैबिनेट की बैठक में अगर कृषि कानून को रद्द करने का फैसला सरकार लेती है तो 29 नवंबर की संसद मार्च पर 27 नवंबर को बैठक करके फैसला लिया जायेगा.

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