शहीद कर्नल बी संतोष बाबू को महावीर चक्र, गलवान संघर्ष के बाकी हीरोज को भी मिले वीरता पुरस्‍कार


नई दिल्ली: पिछले साल जून में लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Clash) में चीन को करारा सबक सिखाने वाले कर्नल बी संतोष बाबू (Colonel Santosh Babu) को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया है. उनकी पत्नी बी संतोषी और मां मंजुला ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुए समारोह में यह अवार्ड हासिल किया. महावीर चक्र बहादुरी के लिए परमवीर चक्र के बाद सबसे बड़ा पुरस्कार है. 

राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट कर कहा, ‘कर्नल बाबू ने दुश्मन का सामना करने के दौरान अनुकरणीय नेतृत्व, दक्ष पेशेवरता और विशिष्ट बहादुरी का परिचय दिया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया.’

15 जून 2020 को हुई थी झड़प

कर्नल बी संतोष बाबू 16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी थे. वे पिछले साल जून में गलवान घाटी में तैनात थे. चीन के सैनिकों के साथ 15 जून 2020 की रात को हुई खतरनाक झड़प (Galwan Clash) में उन्होंने असाधारण बहादुरी का परिचय देते हुए चीनी सैनिकों को जबरदस्त जवाब दिया. उन्होंने ‘ऑपरेशन स्नॉ लेपर्ड’ के दौरान अपनी अंतिम सांस तक दुश्मन के हमले का मुकाबला किया और मैदान में डटे रहकर साथी सैनिकों को लगातार लीड किया. उस झड़प में घायल होने के बाद वे शहीद हो गए थे. इस झड़प में 20 जवानों की शहादत हो गई थी. जबकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन को 45-50 सैनिकों के जान गंवाने पड़े थे. 

इन योद्धाओं को भी मिला सम्मान

गलवान झड़प  (Galwan Clash) में चीनी सैनिकों को करारा सबक सिखाने वाले नायब सूबेदार नुदुरम सोरेन, हवलदार के पलानी, नायक दीपक सिंह और सिपाही गुरतेज सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया. उन्होंने पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. इसी झड़प में घायल हुए 3 मीडियम रेजिमेंट के हवलदार तेजिंदर सिंह को वीर चक्र से सम्मानित किया गया है. वीर चक्र युद्धकाल के लिए देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है.

नायब सूबेदार सोरेन की ओर से उनकी पत्नी लक्ष्मी मणि सोरेन, हवलदार पलानी की पत्नी वनथी देवी और नायक दीपक सिंह की पत्नी रेखा सिंह ने राष्ट्रपति से पुरस्कार ग्रहण किया. वहीं सिपाही गुरतेज सिंह की ओर से मां प्रकाश कौर और पिता विरसा सिंह ने राष्ट्रपति से वीर चक्र हासिल किया. भारतीय थल सेना ने पूर्वी लद्दाख में पोस्ट 120 पर ‘गैलेंट्स ऑफ गलवान’ के लिए एक स्मारक बनाया है.

नायब सूबेदार सोरेन को वीर चक्र

रिपोर्ट के मतुाबिक 16वीं बिहार रेजीमेंट में शामिल नायब सूबेदार सोरेन ने अपनी टुकड़ी की अगुवाई करते हुए भारतीय सेना को पीछे धकेलने की दुश्मन की कोशिश का कड़ा जवाब दिया और वहां पर निगरानी चौकी की स्थापना की. सोरेन ने अपनी टुकड़ी को संगठित कर दुश्मन का जोरदार मुकाबला किया और भारतीय सैनिकों को पीछे धकेलने के उनकी कोशिश को नाकाम किया. इस संघर्ष में घायल होने के बावजूद वे देश की रक्षा के लिए आखिरी वक्त तक लड़ते रहे. 

वहीं हवलदार पलानी भी चीनी सैनिकों के सामने बहादुरी से डटे रहे. जब चीनी सैनिकों ने धोखे से नुकीले हथियारों से उनके साथियों पर हमला बोला तो हवलदार पलानी ने दुश्मनों से भिड़कर अपने साथी जवानों की जान बचाने की कोशिश की. शरीर से काफी खून निकल जाने के बावजूद वे पीछे नहीं हटे और शहीद हो गए. 

नायक दीपक सिंह ने बचाई 30 सैनिकों की जान

नायक दीपक सिंह भी गलवान के संघर्ष  (Galwan Clash) में भूमिका निभाई. वे 16वीं बिहार रेजिमेंट में एक नर्सिंग सहायक के रूप में ड्यूटी कर रहे थे. जब चीन के अचानक हमले से बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक घायल हो गए तो उन्होंने दिन-रात काम करके 30 से ज्यादा भारतीय सैनिकों का इलाज करके उनकी जान बचा ली. 

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पंजाब रेजिमेंट की तीसरी बटालियन के सिपाही गुरतेज सिंह ने चीनी सैनिकों पर निगरानी रखने के लिए गलवान में चौकी बनाई. जब चीनी सैनिकों ने धोखे से भारतीय सैनिकों पर नुकीले हथियारों से हमला कर दिया तो उन्होंने बहादुरी के साथ उनका मुकाबला करते हुए कई चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया. 

मेजर अनुज सूद को मरणोपरांत मिला शौर्य चक्र

समारोह में राष्ट्रीय राइफल्स की 21वीं बटालियन के मेजर अनूज सूद को भी मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. उन्हें यह सम्मान जम्मू कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए दिए गए उनके योगदान के लिए दिया गया. 

(इनपुट भाषा)

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